कवयित्री कुम्भ काव्य महोत्सव एंव सम्मान समारोह सम्पन्न : शाम तक कवयित्रियों ने बांधा समां, श्रोता हुए भाव विभोर
नर्मदापुरम। समाजसेवा,कला, साहित्य,संस्कृति को सर्मपित संस्था नर्मदा आव्हान सेवा समिति व्दारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में "कवयित्री कुंभ" अखिल भारतीय काव्य महोत्सव एंव सम्मान समारोह का आयोजन लिटिल स्टार चिल्ड्रन होम हिरवारा कटनी मे दो सत्रो मे सम्पन्न हुआ।
वरिष्ठ समाज सेवी डा. समीर चौधरी के मुख्यातिथि एंव छाया गुप्ता की अध्यक्षता, स्वेता मिश्रा के विशिष्ट अतिथि में अनूठा आयोजन अखिल भारतीय काव्य महोत्सव, सम्मान समारोह का आयोजन सम्पन्न हुआ।
कवि सम्मेलन देर शाम तक जारी रहा। देश के विभिन्न अंचलों से आई 45 कवयित्रियों ने अपनी कविता, गीत,गजल,ओज,हास्य,व्यंग्य की रचनाओं से भाव विभोर कर दिया।
मुख्यातिथि डा. समीर चौधरी ने नर्मदा आव्हान सेवा समिति मुक्त कंठ से कार्यक्रम कि सराहना करते हुए आयोजक केप्टिन करैया को बधाई देते हुए कहां की ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए।
अध्यक्षता करते हुऐ छाया गुप्ता ने कहां की नर्मदा आव्हान समिति के कवयित्री कुम्भ काव्य महोत्सव में आयी प्रतिभावान कवियित्रियों के प्रति में आश्वस्त हूँ कि आप राष्ट्र और समाज के लोक कल्याण को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट काव्य सृजन करके हिन्दी साहित्य को समृद्ध करेंगी।
उन्होने कहाँ देश मे एक मात्र नर्मदा आव्हान सेवा समिति ही ऐसी संस्था है जो निशुल्क कवि समागम करती है। स्वागत भाषण कैप्टिन करैया ने दिया।
अतिथि एवं कवियों का स्वागत केप्टिन करैया,अनिल मिश्रा,ओमकार शर्मा, हरिओम गुप्ता ने फूल-मालाओं से किया। मां सरस्वती की पूजा अर्चना से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। सरस्वती वंदना इंदौर से आई शीतल देवयानी की प्रस्तुति से सम्मेलन का प्रारंभ हुआ। कवि सम्मेलन दो सत्रों मे किया गया।
अतिथियों की उपस्थिति मे नर्मदा आव्हान सेवा समिति ने अतिथियों की उपस्थिति मे समस्त कवयित्रियों को स्मृति चिन्ह एंव साहित्य गौरव से अलंकृत किया।
कार्यक्रम मे जबलपुर से आई कवयित्री विनिता सोनी
पिता अगर न भी हो बच्चे सम्भाल लेती हैं।
वो तो हर हाल मे बच्चों को पाल लेती हैं है।।
चाहे जितनी भी प्रबंध हो आंचल में।
कड़कती ठंड में बच्चों पे डाल लेती हैं।खूब सराही।
चाहती हो चाँद पर, बेशक निडर होकर के जाना।
रोटियां अवरोध ना हैं, कर न तु इसका बहाना।
ने " प्रस्तुत की।
शहडोल की छाया गुप्ता ने
"कभी मुखर होकर कह दो तुम,बहुत अखरता है यह मौन।
बसे हुए हो स्मृतियों में,
तुम मेरे लगते हो कौन"
पर खूब वाहवाही लूटी ।
शिखा रघुवंशी गंजबासौदा ने
पूर्ण मन से न जीवन बिताया कहीं मन इधर भी रहा मन उधर भी रहा पर खूब वाहवाही लूटी।
कुशल संचालन कर रही प्रियंका मिश्रा ने उनका पौरुष
"दद्दा कहन लगे, यूँ बऊ से,
मजौ न आवत होली में, पकवानों में स्वाद न रह गयो, फागें गवत ना होली में
की ,ऋचायज्ञेश, कटनी ने
"चाहती हो चाँद पर, बेशक निडर होकर के जाना।
रोटियां अवरोध ना हैं, कर न तु इसका बहाना",मीना सिंह" मीनानिल" अनूपपुर ने आज मेरा मन कुछ चिंतित है ,कुछ कुंठित है कही भ्रमित मन भटक गया तो
राह दिखने कौन चलेगा।
ऐसा आजादी रहती है
जैसा मैं तुमसे कहती हूं
कहीं देश में संकट आ जाए तो देश की रक्षा कौन करेगा प्रसिद्धि कस्तवार
कटनी ने" प्यार है
कविता के बोल -
जो तेरी आवाज को हम लगातार सुनते रहे वो प्यार है
जो तेरे राज मेरे हो और हम किसी से न कहे वो प्यार है"।
भोपाल की डाँ.प्रियंका श्रीवास्तव ने शानदार प्रस्तुति दी इस दौरान निधि कटारे भोपाल,अरुणा पाठक रीवा,अंशिका राजा बुंदेला गंज बासौदा,संगीता शुक्ला शहडोल,रंजना शर्मा इंदौर,गायत्री शर्मा इंदौर,रूपाली सक्सेना भोपाल,सविता बांगड़ भोपाल,डॉ मंजू गोरे जबलपुर,श्वेता मिश्रा बैंगलौर,रेखा नायक भोपाल, भोपाल,अर्चना सोनी कटनी सहित अन्य कवयित्रियो ने देर शाम तक श्रोताओं को खूब गुदगुदाय एवं लोट पोट करते हुए बांधे रखा।
कार्यक्रम का संचालन अनिल मिश्रा एंव केप्टिन करैया ने आभार प्रर्दशन किया।
किशोर करैया केप्टिन
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