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रामराज्य सिर्फ सरकारों से नहीं आएगा, हमें राम चरित्र अपनाना पड़ेगा: ओंकारानंद सरस्वती


 

 श्रीराम जन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का द्वितीय दिवस 

रामराज्य सिर्फ सरकारों से नहीं आएगा, हमें राम चरित्र अपनाना पड़ेगा: ओंकारानंद सरस्वती

इटारसी। संपूर्ण नर्मदांचल की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर परिसर तुलसी चौक में 63वे वर्ष में श्री रामजन्म महोत्सव अंतर्गत श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। इस वर्ष श्रीमद प्रयागपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज बाल्मीकि एवं तुलसीदासकृत रामायण पर प्रवचन दे रहे हैं।

आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक क्षेत्रीय विधायक डॉ सीतासरन शर्मा एवं संरक्षक प्रमोद पगारे पत्रकार के मार्गदर्शन में श्री द्वारकाधीश मंदिर परिसर में श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस शुक्रवार को व्यासपीठ पर विराजे महाराज श्री का स्वागत एवं पूजन समिति के अध्यक्ष नीरज जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विपिन चांडक, उपाध्यक्ष विष्णु शंकर पांडे, सचिव अभिषेक तिवारी, संयुक्त सचिव शैलेन्द्र दुबे, कोषाध्यक्ष प्रकाश मिश्रा, सहकोषाध्यक्ष अमित सेठ, देवेंद्र पटेल, एमएल गौर, दिनेश सैनी, पतंजलि परिवार, रेवांचल गौर कुर्मी क्षत्रिय समाज, सेन समाज सहित अन्य लोगों एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने किया। महाराज श्री के स्वागत में यादव समाज एवं कल्चुरी कलार समाज भी शामिल रहा।

व्यासपीठ से संबोधित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य और ऐतिहासिक मंदिर बन चुका है। रामराज्य की कल्पना सभी को है रामराज आना भी चाहिए पर अकेले सरकारों के भरोसे रामराज नहीं आएगा इस कार्य हेतु हमारा भी सहयोग जरूरी है और हमें करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्म प्रधान विश्व करि राखा कर्म ही जीवन में प्रधान है। ईश्वर ने कर्म को प्रधानता दी है। बिना कर्म के हमें किसी से कुछ मिल जाए इसका विचार भी नहीं करना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि प्रभु श्री राम का जन्म राक्षसी प्रवृत्तियों और रावण के कुल के वध के लिए ही हुआ था। 

प्रवचन में हारमोनियम पर दिलीप जी, तबले पर दीपक दुबे, बैंजो पर श्रीराम जी, सहित संकटा प्रसाद मिश्र, दुर्गादत्त तिवारी एवं राहुल जी ने भजनों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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