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नारी और नीर विषय पर वामा साहित्य मंच की संगोष्ठी सम्पन्न

 


 नारी और नीर विषय पर वामा साहित्य मंच की संगोष्ठी सम्पन्न 

इंदौर । नारी और नीर दोनों ही सृष्टि के सर्जक हैं जो अपने आप में  बहुत कुछ आत्मसात कर जीवन को नई दिशा और ऊंचाइयां देते हैं । मार्च माह में मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला और विश्व जल दिवस पर  इसी भाव को केंद्र में रख कर वामा साहित्य मंच की मासिक  संगोष्ठी  'नारीऔर नीर ' विषय पर आयोजित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वाणी जोशी की  सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत मंजू मिश्रा ने किया ।

संस्था की अध्यक्ष ज्योति जैन ने अतिथियों और वामा सखियों का शब्दों से स्वागत करते हुए कहा कि नदी और स्त्री दोनों में अनेक साम्य होने के साथ ही एक फर्क भी है। नदी कभी भी पीछे नहीं पलटती जबकि स्री कभी कभी लौट जाना चाहती है अपनी जड़ों की ओर ,अपने बचपन की ओर ,अपने खिलंदड़े दिनों की ओर।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक ऋतुजा पहाड़े ने की उन्होंने कहा नारी और नीर बिना विश्व में सृजन असंभव है । उन्होंने कहा कि हमें छोटी ‌छोटी आदतें अपना कर जल का संरक्षण करना है और इसे स्त्रियां बेहतर तरीके से कर सकतीं हैं ।टपकते नल को बंद करना, एक बार इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक की बॉटल के प्रयोग को अस्वीकार करना आदि।एक यूनिट बिजली के लिए नो सौ ग्राम कोयले की खपत होती है।हर नारी बचत करना जानती है।

विभा जैन(ओजस) ने इंदौर के वर्तमान परिदृश्य को अपनी कविता में समेटते हुए कहा , 'नारी है जगत जननी और नीर देता जीवन दान/भागीरथ पुरा के घर-घर में नीर से नारी है परेशान ', सरला मेहता ने कहा कि शक्ति, शौर्य, धैर्य हर रंग में रंग /सजग प्रीत की डोर बनती, डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र ने बनारसी गीत में अपनी अभिव्यक्ति दी,' नीर सूखे अ सूखल धरती के हरियर संसार /बिन नारी भूत बन जाता,घर अंगना कुल दुआर ', उषा गुप्ता ने कहा 'नीर और नारी दोनों ही अतुलनीय, अविस्मरणीय और अभिनंदनीय हैं ' , आशा मुंशी की पंक्तियां थीं, ' नारी तुम ना नीर भरी बदली ना तुम अबला ' , सुजाता देशपांडे ने कहा कि जीवन सिक्के के दो पहलू/दोनों ही अनमोल,सरला मेहता बोलीं कि नीर वाष्प जब बन जाता है/तप कर अमृत बरसता है, डॉ अर्चना पंडित ने कहा 'अंत समय आते आते मिलेंगे समंदर /अकेली ही बहने को मैं हूं सर्मथ ' , प्रीति मकवाना ने कहा कि ' नीर समान होती है नारी/हर सांचे में ढल जाती ' ,डॉ विद्यावती पाराशर ने कहा , 'हर परिस्थिति में ढल जाना, नारी से ही सीखा होगा ' ,अल्पना दवे ने बताया कि नारी बिन असंभव सृष्टि की संरचना/नीर बिना असंभव सृष्टि का संचालन,  ' संजीता जैन ने कहा कि उठती गिरती लहरों सा नारी जीवन,आशा मान्धन्या ने बोला ' दोनों को काट ना पाती कोई आरी ' ,निशा देशपांडे ने कहा 'धुंध हो या धूप हो/मौसम का कोई रूप हो ' ,काजल मजूमदार ने कहा, ' मैंने देखें हैं मां के आंचल में रंग हजार' , प्रतिभा मि‌श्रा ने बोला, ' जल की कल कल  बनकर संगीत /सूखी धरा हंसाती है ' । आशा गुप्ता ने कहा, 'नीर पर्यावरण को स्वच्छ रखता/नारी देती संस्कार और शिक्षा ' , भावना दामले ने कहा,'नीर सी कोमल पारदर्शी है नारी ' ।शैला अजबे ने कहा ,गंग-नीर सा पावन आंचल ममता ने ह प्रवाह निरंतर ' , कार्यक्रम में  वृंदा उइके ,शीला श्रीवास्तव , रचना चौपड़ा , तनूजा चौबे , प्रतिभा शाह ,शैला अजबे , डॉ माधवी मधुकर तारे ,अमिता मराठे आदि ने भी ने अपनी प्रतिभागिता निभाई।

कार्यक्रम में पिंटू मिश्रा जी एवं सुरभि जी को सम्मानित किया गया।वामा साहित्य मंच के दो सदस्यों को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संयोजन दिव्या मंडलोई, संचालन प्रीति दुबे ने किया।आभार संस्था सचिव स्मृति आदित्य ने व्यक्त किया।' श्री मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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