अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष :
प्लास्टिक मुक्त हो वातावरण - यह लक्ष्य है पर्यावरण प्रेमी श्रीमती चंदा डांगी का
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर । आजकल हर कोई बात करता है पर्यावरण बिगड़ रहा है ओर इसके दुष्परिणाम हम सब भोग रहे हैं पर पर्यावरण सुधार और संरक्षण के लिए कम ही लोग सक्रिय हैं ,
मंदसौर में महिला श्रीमती चंदा डांगी सामाजिक सांस्कृतिक सेवाओं में योगदान कर रहीं हैं पर पर्यावरण सुधार हेतु बहुत आगे बढ़ कर कार्य कर रही हैं ।
उनका लक्ष्य है कि प्लास्टिक बंद हो जाए क्योंकि यह प्रामाणिक रूप से सिद्ध हो गया है कि अंततः प्लास्टिक प्राणी मात्र के लिए घातक है ।
*मिशन* -- सिंगल यूज़ प्लास्टिक (पोलीथीन बैग) के विकल्प के रूप में पुराने अखबारों से पेपर बैग तथा कपड़े के बैग सिलकर स्कूली छात्रों, महिलाओं और अन्य संस्थाओं में निशुल्क वितरण एवं बनाने का प्रशिक्षण देकर जागरूकता फैलाना।
*ट्रिगर पॉइंट* -- सन् 1996 में दैनिक "नई दुनिया" में प्रकाशित खबर जिसमें मृत गाय के पेट से पोलीथीन बैग्स का जखीरा मिला जो उसकी मौत का कारण बना । इस खबर ने मुझे झकझोर दिया और अबोध पशुओं की पोलीथीन बैग से सुरक्षा मेरा मिशन बन गया।
*मिशन की शुरुआत* -- विक्रम सीमेंट कालोनी में डेढ़ क्विंटल अखबार इकट्ठा करके छः परिवारों को पेपर बैग बनाने के रोजगार में लगाया तथा कालोनी के शापिंग कांप्लेक्स को पोलीथीन मुक्त करने में सफलता अर्जित की ।
*आगे की यात्रा*-- पुराने अखबारों के अलावा नये पुराने कपड़ों से स्वयं थैलियां सिलना चालू किया, स्कूलों/ संस्थाओं में प्रशिक्षण के साथ स्वनिर्मित थैलियों का निःशुल्क वितरण कर पोलीथीन की थैलियों से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाई।
यह क्रम निरन्तर चल रहा है ओर स्वयं के व्यय और सहयोग से लगभग एक लाख से अधिक निर्माण कर निःशुल्क वितरण किया जा चुका है और प्रतिदिन चल रहा है ।
श्रीमती चंदा डांगी ने बताया कि पति श्री अजय डांगी विक्रम सीमेंट यूनिट खोर जावद में इंजीनियर रहे तभी से पर्यावरण क्षेत्र में समर्पित होकर दोनों कार्य कर रहे हैं और समाज, संस्थाओं संगठनों और प्रशासन स्तर पर भी सहयोग मिल रहा है ।
*कार्यक्षेत्र*-- 1996 से 2001: विक्रम सीमेंट यूनिट खोर जावद मंदसौर, नीमच और भदेसर राजस्थान।
2001से 2021: आदित्य सीमेंट शम्भूपूरा, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, प्रतापगढ़, बड़ी सादड़ी,सांवलिया जी मंदिर, पशुपतिनाथ महादेव मंदिर मंदसौर के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्था स्पिक मैके के अंतराष्ट्रीय अधिवेशनों में आई आई टी गौहाटी, मुम्बई, दिल्ली, चैन्नई, इंदौर, हैदराबाद,जे एन यू दिल्ली, डी पी एस बैंगलोर,वी एन आई टी नागपुर आदि में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों, आई आई टी के डायरेक्टर्स एवं प्रोफेसर्स, स्टूडेंट्स,वालिंटियर्स तथा मेस में कार्य करने वालों को स्वनिर्मित कपड़े की थैली भेंटकर अपने मिशन के बारे में बताया ।
इसके अलावा चित्तौड़गढ़ राजस्थान की विभिन्न संस्थाओं कर्तव्य मंच, मीरा महोत्सव, नगरपालिका, लायनेस क्लब, आकाशवाणी चित्तौड़गढ़, मानवाधिकार आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग, कलेक्ट्रेट, विभिन्न विद्यालयों में निशुल्क वितरण एवं प्रशिक्षण।
2021 से 2025 मंदसौर नगर की विभिन्न संस्थाओं, शिवना शुद्धिकरण अभियान, भारत विकास परिषद, इनरव्हील क्लब, बीजेएस,बड़े साथ ओसवाल महिला मंडल, संगीत महाविद्यालय, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जनपरिषद, सीतामऊ साहित्य महोत्सव,नारद जयंती पत्रकार महोत्सव मंदसौर, करणी इंटरनेशनल स्कूल,सी एम राइज साबा खेड़ा विबोध प्रीस्कूल शिवना एरिया वॉटर पार्टनरशिप संस्था आदि कई विद्यालयों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों आदि को निशुल्क थैलियां वितरित की ।
मुम्बई की संस्था अग्नि शिखा मंच, 365दिन 365 स्टोरी रचना लचके वागवे द्वारा यूं ट्यूब पर इंटरव्यू, दिपिका मनवानी के यू ट्यूब चैनल , सेंट्रल बैंक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मंदसौर , लाभ मुनि नेत्र चिकित्सालय , सार्थक वेलफेयर सोसाइटी ,अंतरराष्ट्रीय जैन साहित्य संगम मुम्बई व देवगढ़ अधिवेशन, पुणे आर्ट एंड कामर्स कालेज, कलर्स इंटरनेशनल स्कूल पुणे, खानदेश युनिवर्सिटी जलगांव, सरस्वती विद्यालय मंदसौर, भारत विकास परिषद दिल्ली की तीन शाखाओं, मुज्जफर नगर, शिलांग के म्यूजियम , समाचार पत्र द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों , सुवासरा पत्रकार सम्मेलन 2026 में हजारों कपड़े और कागज़ की निशुल्क थैलियां वितरित,
श्रीमती चंदा डांगी ने प्रश्न के उत्तर में कहा कि *आगे क्या*-- महात्मा गांधी जी के चरखे की तरह कपड़ा खरीद कर मेरी सिलाई मशीन रोजाना पंद्रह बीस कपड़े की थैलियां सिले बिना आराम नहीं करती । ओर पिछले तीस वर्षों से यह क्रम ईश्वरीय कृपा से अनवरत चालू है इसमें परिवार, समाज, ईष्ट मित्रों, संस्थाओं, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सबका समय- समय पर सहयोग मिल रहा है सबके प्रति आभार व्यक्त करती हूं ।
श्रीमती चंदा डांगी जैन समाज अन्य सामाजिक धार्मिक आध्यात्मिक आयोजनों में निःशुल्क थैलियां वितरण करने के साथ डिस्पोजल के स्थान पर स्टील कांच और धातु के बर्तनों में पानी ज्यूस चाय कॉफ़ी पेय पदार्थों के लिए उपलब्ध कराती हैं।
स्वयं प्रोत्साहित करते हुए साफ़ सफ़ाई भी स्वयं करते हुए देखी जाती हैं उनकी मान्यता है कि आप स्वयं करेंगे तो अन्य जागृत होंगे और तभी पर्यावरण क्षेत्र में सुधार होगा ।
आपका कहना है कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा।
स्पीक मैके, जन परिषद , अखिल भारतीय साहित्य परिषद , सार्थक संस्था, भारत विकास परिषद, दशपुर वैभव संगम , पत्रकार संगठन, जैन समाज आदि ने श्रीमती चंदा डांगी को समय समय पर सम्मानित किया ओर उनके पर्यावरण सुधार मिशन को समर्थन दिया है ।
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