काव्य :
मन फागुन फागुन हो जाए
रंग देना तुम ऐसे रंग में ,
मन फागुन फागुन हो जाये ,
टेसू का रंग पीत -ख़ुशी का,
हर सिंगार पिया मन -भावन
लाल-गुलाबी ,अनुरागी रंग,
अधरों पर हों गीत सुहावन ,
लिख देना प्रिय,गीत प्रणय का,
मन श्यामा-मधुवन हो जाये ,
रंग देना तुम ऐसे रंग में ,
मन फागुन फागुन हो जाये ,
नैनो की चितवन को रंगना,
धरा-गगन सा मौन समर्पण
होली की मदभरी सांझ में ,
नव रंगों से रंजित आंगन ,
रंगो की घन -घटा रंगीली,
मधु-रस मय -सावन हो जाये
रंग देना तुम ऐसे रंग में ,
मन फागुन फागुन हो जाये.
- पद्मा मिश्रा जमशेदपुर झारखंड
Tags:
काव्य
.jpg)
