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अखिल भारतीय कलामन्दिर समूह भोपाल का होलिकोत्सव सम्पन्न



अखिल भारतीय कलामन्दिर समूह भोपाल का होलिकोत्सव सम्पन्न

भोपाल । अखिल भारतीय कलामन्दिर समूह भोपाल का होलिकोत्सव रस रंग समारोह हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन पारंपरिक लोकभाषाओं के होली गीतों शास्रीय गायन संगीत, नृत्य, एवं फूलों और गुलाल के साथ सम्पन्न हुआ।

अखिल भारतीय कलामन्दिर के तत्वावधान में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी होली - रंगपंचमी के रंगारंग अवसर पर रस-रंग समारोह का आयोजन विश्वसंवाद केंद्र शिवाजी नगर भोपाल में  किया गया। प्रथम सत्र में हास्य व्यंग्य रचनाओं का पाठ, एवं द्वितीय सत्र में लोकभाषा के होली गीतों की सांगीतिक प्रस्तुतियों के साथ रंसरंग कि छटा बिखर गई ।कार्यक्रम की अध्यक्षता - डॉ. गौरीशंकर शर्मा ’गौरीश’ राष्ट्रीय अध्यक्ष कलामन्दिर संस्था भोपाल ,मुख्य अतिथि - डॉ. राजेश श्रीवास्तव निदेशक रामायण केंद्र भोपाल , विशिष्ट अतिथि : डॉ विष्णु राजोरिया, अध्यक्ष  परशुराम कल्याण बोर्ड,विशिष्ट अतिथि : श्री पुष्पेंद्र अहिरवार वरिष्ठ पत्रकार लोकदेश समाचारपत्र एवं सारस्वत अतिथि : श्री उल्हास तैलंग, वरिष्ठ संगीतकार थे । कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन वी के श्रीवास्तव एवं द्वितीय सत्र का संचालन श्रीमती सुनीता शर्मा जी ने किया । 

             माल्यार्पण,दीप प्रज्वलन के उपरांत श्रीमती दुर्गा सिंह जी ने सरस्वती वंदना की तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत पुष्पहार एवं डा. गौरी शंकर शर्मा ‘गौरीश’ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था भोपाल के द्वारा स्वागत व्यक्तव्य द्वारा किया गया एवं बारह राशियों के चटपटे राशिफल को सुनाया। मुख्य अतिथि डॉ विष्णु राजोरिया द्वारा पौराणिक संदर्भों में होली के महत्व पर प्रकाश डाला, विशिष्ट अतिथि डॉ राजेश श्रीवास्तव निदेशक रामायण केंद्र द्वारा फाल्गुन मास में होली के विभिन्न रंगों की व्याख्या की तथा उनकी चंदा मामा रचना को प्रस्तुत कर सभी की सराहना प्राप्त की

डॉ गौरीशंकर शर्मा ‘गौरीश’ द्वारा रचित श्री राम चालीसा को डॉ दुर्गा सिंह के साथ सभी ने सस्वर सांगीतिक वाचन कर समारोह के प्रथम चरण का आगाज़ किया।

प्रथम सत्र में श्री अशोक धमेनिया ने - तम को ये लिख दें दिनकर सा,  डॉ सुनीता शर्मा ‘सिद्धि’ ने - राधा की भीगी चुनरिया,  डा. गिरीश दुबे बेधड़क ने - आठवे जन्म का एग्रीमेंट, क्या डोनाल्ड ट्रंप से कर लिया, सिंगरौली से आए श्री नारायण दास ‘विकल’ ने - प्रेम एक समर्पण है, डा.कमल किशोर दुबे ने - बाँध लेना गाँठ आज, बिगड़ ना जाये साज, श्री शरद पटेरिया ने - महाकाल की होली, श्री गोकुल सोनी जी ने - पुल का बनो, सखी छायो बसंत है,

श्री राजेश तिवारी जी - एक अकड़ू सा दामाद होली में ससुराल आया, श्रीमती सुधा दुबे - होली में उम्र का तक़ाज़ा था, श्री राजेन्द्र गट्टानी जी ने - सड़क से निकली हुरियारो की टोली, श्रीमती सरोज लता सोनी ने ‘ होली खेल रहे नेता जी, इसके साथ ही श्रीमती राधा रानी चौहान, मधुलता शर्मा, और दुर्गा सिंह जी ने भी कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । 

                  कार्यक्रम का द्वितीय चरण विभिन्न समूहों द्वारा लोकभाषाओं में फागुन / होली के गीतों की सांगीतिक प्रस्तुतियों से प्रारंभ हुआ । श्रीमती आशा श्रीवास्तव एवं सखियों द्वारा फागुन में आग लगाए रसिया, श्रीमती सुधा दुबे एवं सखियों ने होली खेल रहे नंदलाल, डॉ सुनीता शर्मा सिद्धि एवं साथियों ने राधा की भीगी चुनरिया , डॉ. दुर्गा सिंह एवं साथियों ने- जुलम कर डारो सितम कर डारो के अतिरिक्त सारस्वत अतिथि श्री उल्हास तैलंग जी ने अपने संगतकारों के साथ अपने शास्रीय होली गीतों की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम में संस्था की उपाध्यक्ष डॉ वन्दना मिश्र,  श्री अरविंद मिश्र, श्री बिहारीलाल सोनी 'अनुज' युगल' , श्रीमती सीमाहरि शर्मा सहित शहर के तमाम साहित्यकार एवं रंसरंग प्रेमी प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सांगीतिक प्रस्तुतियों में मस्त श्रोता पुष्पकलियो गुलाल की वर्षा करते और नृत्य करते रहे। हॉल सारा होली के रंग में मस्त रहा , करीब 4 घंटे चला यह अभूतपूर्व आयोजन रहा।

                    कार्यक्रम के अंत में श्री हरिवल्लभ शर्मा ‘हरि’ कार्यकारी अध्यक्ष अखिल भारतीय कला मंदिर संस्था भोपाल द्वारा आभार प्रदर्शन कर कार्यक्रम का समापन किया गया ।

 

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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