काव्य :
"दोहे"
बना मुक्ति का धाम
भक्ति-शक्ति सबकी अलग,अलग-अलग पहचान।
भक्त शिरोमणि एक ही,राम भक्त हनुमान।।
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राम नाम आधार है,पवन पुत्र का नाम।
सुमिरन से हनुमान के,बनते सारे काम।।
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राम लखन कंधे धरे,भार उठाते क्षेम।
सेवक बन हनुमान ने,पाया अदभुत प्रेम।।
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विचलन मन का थम गया,लेकर हनु का नाम।
सारा जग सुंदर हुआ,बना मुक्ति का धाम।।
- वैशाली रस्तौगी
जकार्ता,इंडोनेशिया
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