काव्य :
बेटे को भी समझो
बेटा वही अच्छा जो संस्कारी हो...
राम -लक्ष्मण सा आज्ञाकारी हो...
पर बेटा वही जिसमें अच्छाई और सच्चाई हो...
व्यवहार में वफ़ादारी हो...
क्यूँ कि जरूरी नहीं कि जो माता-पिता ने कही हो...
वो बात आज के ज़माने के हिसाब से सही हो...
कभी-कभी बड़ो से भी गलतियाँ हो जाती हैं...
उनकी समझ पुराने विचारों में खो जाती हैं...
ऐसे में बेटा यदि बात न मानता हो...
तो उसका कोई दोष नहीं हो...
माँ की ममता का देकर वास्ता उसको...
खुद की नज़रों में बेटे को बदनाम न करो...
-मीना पांडेय , प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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