सरोकार साझा मंच की मासिक बैठक: संविधान और विवाह के बदलते प्रतिमान पर चर्चा
इंदौर । सरोकार साझा मंच की मासिक बैठक में 'भारतीय संविधान - जैसा मैंने समझा' और 'विवाह के बदलते प्रतिमान' पर चर्चा की गई। आयोजक माधुरी निगम ने संविधान के लोकतान्त्रिक स्वरूप पर विचार रखे। वक्ताओं ने संविधानिक प्रावधानों का पालन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और विवाह के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।
करुणा प्रजापति ने बेहतर समाज के निर्माण के लिए संविधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन और आत्ममंथन जरुरी बताया। डॉ. अर्चना त्रिवेदी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के परिप्रेक्ष्य में डिजिटल मीडिया में अमर्यादित और बिगड़े बोल की समस्या बताई। महिमा शुक्ला ने संविधान के स्वरूप, सरकार में 'शक्ति संतुलन' और संशोधन प्रकिया पर बात की। मृदुला शर्मा ने पुनः एक बड़े आंदोलन की जरूरत बताई जिससे पीड़ित को समय पर और सही न्यायिक राहत मिल सके। अमिता मराठे ने संविधान को जनहित का सुरक्षा कवच बताया।
गायत्री शर्मा ने 'विवाह संस्कार के बदले स्वरूप' में बढ़ते अनावश्यक खर्च, महंगे आयोजन और दबाव पर बात की। आशा मुंशी ने अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाहों की समस्यायें रेखांकित कीं। निर्मला बागोरा, संतोषी यदुवंशी, कृष्णा जोशी और कविता मेहता ने पारिवारिक व्यवस्था, नैतिकता और असुरक्षित विवाह सम्बन्ध पर चर्चा की।
अर्चना पंडित, वंदना मिश्रा, समिधा शुक्ला, कविता चौहान, संगीता चौहान , जयश्री शर्मा और वंदना शर्मा ने मधुर स्वर में जगजीत सिंह, गुलज़ार, दुष्यन्त कुमार की गज़लें प्रस्तुत कीं। अंत में समापन रोचक गेम व पुरस्कार वितरण से हुआ। आभार गायत्री शर्मा ने प्रकट किया।
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