एक शाम काव्य चौपाल के नाम
भोपाल । अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मध्य प्रदेश इकाई भोपाल की अप्रैल मास की काव्य चौपाल एल्डर फर्स्ट में त्रिलंगा में बहुत आत्मीय और हर्ष-उल्लास के माहौल में संपन्न हुई उप। संस्था की सम्मानित सदस्य सरोज लता सोनी जी के जन्मदिन का भी अवसर था। जन्मदिन की शुभकामनाएं जहां कक्ष में हिलोर ले रही थीं वहीं सदस्यों की विविध रंगी कविताओं का पाठ वातावरण को सुवासित कर रहा था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक और अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव जी ने की और कार्यक्रम का संचालन विनीता राहुरीकर जी ने किया।
कविताएं, गजल, गीत के अनेक स्वर थे वहीं अनेक गंभीर विषयक कविताएं भी सभी को विचार मग्न कर रही थीं।
कार्यक्रम की शुरूआत सरोज लता सोनी जी की प्रेम कविता और पतझड़ कविता से हुई।
अभिलाषा श्रीवास्तव जी की प्रेम में डूबी गजल तारीफ के काबिल थी। उन्होंने सुनाया…
इश्क की सच्ची कहानी लिख रही हूं
सच कहूं तो मुंह जुबानी लिख रही हूं ..
नीलिमा रंजन जी ने प्रेम की मासूम सी कविता सुनाई। सभी डूबे सुनते रहे जब उन्होंने कहा…
तुम मेरे पास बैठे किताबों के पन्ने पलटते रहे
वक्त चलता रहा दिन निकलते रहे …
जया केतकी जी ने स्त्रियों के स्वाभिमान को रेखांकित करती बहुत विचारणीय कविता सुनाई।उन्होंने कहा..
झुकना सीख रही है वह
आने वाले समय के साथ..
जया आर्य जी ने बहुत संवेदनशील कविता सुनाई। सब ध्यान मगन सुनते रहे जब उन्होंने कहा…
नहीं हूं अब मैं साथ तुम्हारे,
शायद सदा तुम्हारी बनकर,
पर रहूं मैं आगे पीछे
मत करना आजाद मुझे।
रेनू श्रीवास्तव जी ने युद्ध की विभीषिका पर मन को अलोड़ती गजल सुनाई…
खड़े हैं दीवार दरअकेले
उदास चौखट है घर अकेले..
विनीता राहुरीकर जी ने प्रेम के पलों को अपनी कविता में जीवंत किया। उन्होंने कहा…
जिंदगी का सफर, एक टुकड़ा कम से कम
ऊँचे दरख्तों की छाँव में,
तेरे कदमों के साथ कभी कर पाऊं
यही हसरत है..
संतोष श्रीवास्तव जी ने
एक भ्रम पलता है
जो साथ-साथ चलता है
हवा में होती है
वादों की मोहक सुवास
शून्य में दिखता है
रंगों के स्वप्नजाल का
रंगधनुष
जिसका न आदि है न अंत
न कोई समाधान
विचारणीय कविता सुनाई।
मृदुल त्यागी जी ने जीवन के पथिक स्वभाव की कविता से सबका मन मोह लिया।
रानी सुमिता ने कलाकारों की स्थिति पर विचारणीय कविता सुनाई.
तालियों की गूंज से मुस्कुरायेंगी
कलाकार की चमकती आंखें
देखो कलाकार, पर विनीत भाव से कहना मत
चढ़ावा कुछ चढ़ाने को
हो कर खुश
उठाना मत उन पैसों को
जो लोगों ने फेके हों
दया भाव के दान की तरह
काव्य चौपाल में मिल-बैठ कर हंसते-बोलते, सुनते- गुनते कविता सुनने-सुनाने की परंपरा का निर्वाह विश्व मैत्री मंच के सदस्य बखूबी प्रति माह कर रहें हैं जो कविता गोष्ठी की एक स्वस्थ परंपरा कही जा सकती है।
प्रस्तुति..
रानी सुमिता
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