ad

काव्य : घर एक मंदिर - मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई


 

काव्य : 

 घर एक मंदिर 

"आनंद" अपनत्व से भरपूर प्यारा सा परिवार,

मिलें जहॉं बुजुर्गों का सानिध्य छोटों का चटकार,

जीवन किताब के हर कोरे पन्ने को जो चमकाएं,

त्याग तपस्या पवित्र भावनाएं धरोहर व संस्कार ।


हो अगर यहॉं सच्चा प्रेम विश्वास समर्पण कनिका,

तो खिलती खुबसूरत रिश्तों की कोमल कलिका,

घर की नींव स्तंभ को बलशाली और पुष्ट बनाएं, 

आशीष अनुभव आपसी सूझबूझ की चंद्रिका ।


सुख-दुःख हर एक घड़ी गर्माहट भरा ही आलिंगन,

अपनों के साथ से तो चल पड़ता है रूका जीवन,

सदस्यों की रंगी फुलवारी को पल-पल ही महकाएं,

घर की नींव मान-सम्मान वट वृक्ष हरा-भरा ऑंगन ।


घर एक मंदिर मन की पवित्रता करती यहीं निवास,

यहॉं पनपते हैं जीवन रंगमंच के आत्मिक एहसास,

अपनी कुटिया को स्वर्ग से भी सुंदर संवारे सजाएं,

सदस्यों की भूमिका हैं खास स्पंदन दिल के पास ।


घर जहॉं थके कंधों को मिलता स्नेहिल सहारा,

जिसकी दीवारों में गूॅंजता हैं नेह संगीत प्यारा,

सपनों को साकार करने का दम-खम भी दिलाएं,

प्रतिकूलता को पीछे छोड़ बहे एकल जीवन धारा ।


-  मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई 


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post