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विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' 28 मई पर विशेष: मासिक धर्म: मानसिक स्वास्थ्य चुनौती व समाधान - डॉ मनोज कुमार तिवारी , वाराणसी

विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' 28 मई पर विशेष: मासिक धर्म: मानसिक स्वास्थ्य चुनौती व समाधान

 


- डॉ मनोज कुमार तिवारी 

वरिष्ठ परामर्शदाता 

एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू।

      मासिक धर्म के बारे में बात करना आज भी एक तरह से वर्जित है। कुछ संस्कृतियों में मासिक धर्म को अपवित्र माना जाता है। इसी वजह से लोग इस पर चुपी साधे रहते हैं। जबकि यह शरीर की एक सामान्य व आवश्यक क्रिया है, जो प्रजनन व संतान उत्पत्ति के लिए महत्वपूर्ण है। मासिक धर्म से जुड़ी नकारात्मक सोच के कारण लड़कियांँ/महिलाऐं इस बारे में सही जानकारी से वंचित रह जाती हैं।

हर साल 28 मई को मनाए जाने वाले 'विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' का उद्देश्य माहवारी से जुड़े कलंक को मिटाना और सुरक्षित स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस तिथि का प्रतीकात्मक महत्व है। मई वर्ष का 5वाँ महीना है, जो मासिक धर्म की औसत अवधि को दर्शाता है। 28वाँ दिन मासिक धर्म चक्र की औसत लंबाई को दर्शाता है ।विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस 2026 की थीम "एक मासिक धर्म अनुकूल दुनिया के लिए एक साथ"।

औसतन एक महिला अपने जीवनकाल में लगभग 7 वर्षों तक मासिक धर्म का अनुभव करती है। रक्तस्राव (पीरियड) आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक रहता है। मासिक चक्र लगभग 28 दिनों का होता है, लेकिन यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है और 21 से 35 दिनों तक भिन्न हो सकता है। माहवारी/मासिकधर्म (पीरियड्स) के दौरान एस्ट्रोजन  और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव मस्तिष्कीय रसायन (सेरोटोनिन) को प्रभावित करता हैं। जो शारीरिक ऐंठन, मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, चिंता और अत्यधिक थकान का कारण बनता हैं। लगभग 30-80% महिलाओं में यह बदलाव सामान्य 'प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम' होता है। कुछ महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का गंभीर रूप प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर होता है। इसके लक्षण इतने तीव्र होते हैं कि दैनिक जीवन प्रभावित होता है।

*स्वस्थ मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाएँ:-*

# सैनिटरी पैड को हर 4-6 घंटे में बदलें या गीला होने पर पहले ही बदल दें।

# मासिक धर्म संबंधी उत्पादों को बदलने से पहले और बाद में अपने हाथ साबुन से धोएं।

# साफ और हवादार अंडरवियर पहनें

# गुप्तांगों में सुगंधित उत्पादों का प्रयोग करने से बचें।

# प्रयुक्त उत्पादों का सुरक्षित तरीके से निपटाऐं।

# पुनः उपयोग किए जाने वाले कपड़े के पैड को अच्छी तरह से धोएं व धूप में सुखाएं।

# अपने मासिक धर्म चक्र की तिथियों, प्रवाह, दर्द और लक्षणों पर नजर रखें।

 # रक्तस्राव, दर्द, स्राव या दुर्गंध असामान्य लगे तो चिकित्सक से परामर्श लें।

माहवारी से एक-दो सप्ताह पहले महिलाओं को निम्न लक्षण महसूस होते हैं - 

*शारीरक लक्षण:-*

# स्तन में संवेदनशीलता बढ़ जाना।

# भूख में बदलाव (अधिक/कम खाना)

# भार बढ़ना 

# पेट फूलना

# पीठ दर्द

# सिर दर्द 

# जी मिचलाना 

# कब्ज़ 

*मनोवैज्ञानिक लक्षण:-*

# चिड़चिड़ापन 

# छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।

# अचानक उदासी 

# रोने की इच्छा होना

# नींद में परेशानी 

# अत्यधिक थकान 

# दु:खी रहना

# कमजोरी 

# बेचैनी

# घबराहट

# आत्महत्या के विचार आना

# एकाग्रता में कमी

# भोजन की अत्यधिक लालसा

# कुछ खास खाने की इच्छा होना

# अचानक रोने का मन करना

# आत्मविश्वास में कमी

*माहवारी में मानसिक स्वास्थ्य सुधार के उपाय:-*

*मनोवैज्ञानिक उपाय:-* संज्ञानात्मक-व्यवहारिक चिकित्सा (सीबीटी) जैसी उपचार पद्धतियाँ मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से जुड़े भावनात्मक लक्षणों को कम करने में प्रभावी होती हैं। व्यक्तिगत परामर्श व रिलैक्सेशन एक्सरसाइज की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।

*व्यवहारिक उपाय:-*

*महावारी चक्र ट्रैस करें:-* अपनी महावारी व भावनाओं पर नज़र रखने के लिए पीरियड ट्रैकिंग ऐप या डायरी का उपयोग करें, ताकि उन दिनों के अनुसार दिनचर्या में परिवर्तन कर सकें तथा आने वाले बदलावों के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकें। 

*संतुलित आहार लें:-* भोजन में हरी सब्जियां, फल व नट्स शामिल करें। कैफीन व शराब का सेवन न करें क्योंकि ये मनोदशा को नकरात्मक रुप से प्रभावित करता है।

*व्यायाम व योग करें:-* नियमित रूप से 30 मिनट का व्यायाम व योग तनाव को कम करने में मदद करता है।

*पर्याप्त नींद लें:-* हर 24 घंटे में  कम से कम 7 घंटे की अच्छी नींद लें ताकि थकान व चिड़चिड़ापन कम हो सके।

*सेल्फ-केयर:-*

माहवारी में खुद पर काम का ज्यादा दबाव न लें। आनंद दायक स्नान, संगीत सुनना, किताब पढ़ना व प्रकृति के बीच रहना मन को शांत, सुखद व स्थिर महसूस कराता है।

*संयमित स्क्रीन टाईम:-* मोबाइल की लत मासिक धर्म पर गहरा व नकारात्मक प्रभाव डालता है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद को बिगाड़ देती है, जिससे मेलाटोनिन व कोर्टिसोल हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। जिससे अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक दर्द और हार्मोनल विकारों होता है। इसलिए स्क्रीन टाइम को नियंत्रित रखना लाभप्रद होता है।

*चिकित्सा प्रबंधन::-* मासिक धर्म संबंधी विकारों के शारीरिक पहलुओं का प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हार्मोनल थेरेपी, दर्द निवारक दवाएं या सर्जरी जैसे उपचार शारीरिक लक्षणों को कम कर सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव में भी कमी आती है। जो लोग पीएमएस या पीएमडीडी से गंभीर रूप से पीड़ित हैं, उनके लिए मासिक चक्र के कुछ निश्चित समयों में एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाएं बहुत फायदेमंद साबित होती हैं।

यदि मासिक धर्म के दौरान मानसिक तनाव असहनीय हो जाता है या अत्यधिक नकारात्मक/आत्महत्या के विचार आते हैं, तो मनोचिकित्सक या स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह आवश्यक है।

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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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