काव्य :
बशीर बद्र नमन और श्रद्धांजलि
ग़ज़ल लिख *ब्रज*,हो गंभीर,हर शेर की कद्र कर
वजन और सीख डाल उनमें,उन्हें *बशीर बद्र* कर
अशआर कर सरल,पहुँचें वो जन जन तक
जेहन में गजल कर जाए घर,हो जाये वो अमर
ग़ज़ल के मक्ता और मतला हों हर हाल मतलब के
पढ़ें शायर सलीके से, सधे हों गजल के मीटर और बहर
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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