काव्य :
!! गीतिका !!
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मोहब्बत की अदाकारी ही कर लें।
निभा किरदार फ़नकारी ही कर लें।
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सहारा दे जिन्होंने भी सँभाला,
भले मन से वफ़ादारी ही कर लें।
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ठगें न, नहीं ठगने दें किसी को,
जगत में यह समझदारी ही कर लें।
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प्रभु की कृपा से जो भी है पाया,
बांँट कुछ अंश दिलदारी ही कर लें।
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न मांँगें, श्रम करें पैसे कमायें,
मिलेगा मान खुद्दारी ही कर लें।
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जहांँ सच को निभाना कष्टकारी,
वहांँ मन को भी चिंगारी ही कर लें।
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वतन हित एकता की है जरूरत,
स्वयं को राष्ट्रध्वजधारी ही कर लें।।
- रामकिशोर श्रीवास्तव 'रवि', भोपाल
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