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काव्य : संशय से यकीं तक - साधना अरविंद विहार भोपाल



काव्य : 

संशय से यकीं तक

दिल के वीराने में अक्सर
अजब सा संशय गूंजा करता !
हर बार जो कहता सरगोशी से
क्या सचमुच है कोई ख़ुदा !

एक रोज़ रूह ने  हँसकर
मुझको एक राज़ बताया !
जिसको बाहर ढूंढ रही हो
उसने अंदर ही तुझमें घर किया !

वो ही मंदिर और मस्जिद में 
वो ही सजदा और पूजा में!
संशय के सब प्रश्न मिटे 
जब इश्क ने उसके हौले से छुआ !

अब न मंज़िल अब न राही 
अब न दूरी अब न फ़ास !
जिसको पाने निकली थी मैं 
वो तो बैठा है मेरे ही पास !

संशय की हर रात पिघल कर 
यकीं की सुबह में ढल गयी !
मैं जब अपने भीतर उतरी
मेरी रूह खुदा से मिल गयी !

 - साधना 
अरविंद विहार 
भोपाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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