काव्य :
जब दिल ना लगे
जब दिल ना लगे अकेले में आ जाना नीचे मेले में
हम दुनिया नयी बसाते हैं और सबका दिल बहलाते हैं ।
जब--चाहे हो कोई बेगाना हम अपना उसे बनाते हैं
और हाथ बढ़ाकर नमस्ते कर उसे अपने पास बुलाते हैं।
चाहे सर्दी हो या गर्मी, या आँधी ओले पड़ते हो,
हम बैठ पार्किंग में अपना थोड़ा सा वक्त बिताते हैं।
जब--जब सर्दी ज्यादा पड़ती है, कम्बल की सेज सजाते हैं,
गर्मी में मच्छर कांटे तो पँखो की सभा सजाते हैं।
मन में कितनी भी दुविधा हो, शंका समाधान बताते हैं,
जब--आनन्द किसी के घर में हो तो मुँह मीठा करवाते हैं।
और ग़म में देकर हमदर्दी कुछ अच्छी बाते बताते हैं
जब छोटे छोटे बच्चे भी जब वो पास हमारे आते हैं।
बातों बातों में सिखलाकर उन्हें संस्कार दे जाते हैं,
उनके छोटे झगड़े हम प्यार से ही सुलझाते हैं ।
और कुछ ना मिले तो कभी, कभी हम भेड़ पुराण भी गाते हैं
जब दिल लगे अकेले में आ जाना नीचे मेले में।
- प्रतिभा जैन, नवी मुंबई
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