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काव्य : बोलती लड़की -सरिता सिंह ,गोरखपुर



काव्य : 

बोलती लड़की 

बोलती लड़की 
घर की दीवारों पर धब्बा बन गई 
हँसती लड़की 
मोहल्ले की हवस बन गई,
चुप लड़की 
कायर कहलाने लगी,
और जो रो पड़ी 
कमज़ोर।

माँ बोली -
“बेटी, सम्हल कर चलना, 
दुनिया बदलती नहीं इतनी जल्दी”
बेटी बोली -
माँ, अगर तुमने चलना शुरू किया होता,
तो शायद आज मुझे दौड़ना पड़ता ही नहीं

अब लड़की ने कपड़े बदले नहीं,
नज़रिया बदला,
अब वह ‘सहने’ की बजाय
‘टोकने’ लगी है,
और यही सबसे बड़ा अपराध हो गया।

लड़की अभिशाप नहीं 
क्योंकि वह घर नहीं,
अपना नाम  बुन रही है,
उसका यूटोपिया
अब रसोई नहीं,
कला, विज्ञान, राजनीति, जंगल
पर्वत और सड़कों पर भी है।  
लड़कियां जान गई हैं 
परचम बनाने का तरीका 
और परचम के साथ चलने का सलीका .

- सरिता सिंह ,गोरखपुर
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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