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कहानी का वर्तमान स्वरुप बहुत व्यापक हो गया है - संतोष श्रीवास्तव

 

कहानी का वर्तमान स्वरुप बहुत व्यापक हो गया है - संतोष श्रीवास्तव 

भोपाल । अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच का एक अभिनव आयोजन, कहानी संवाद “दो कहानी- दो समीक्षक” का आयोजन सोमवार को शाम 6:30 बजे, गूगल मीट पर आयोजित किया गया। 
इस अवसर अध्यक्षता कर रही अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहानी संवाद में पढ़ी गई दोनों कहानियों पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी व्यक्त हुए कहा कि - 
“कहानी का वर्तमान स्वरुप बहुत व्यापक हो गया है। स्टोरी टेलिंग विधा बहुत पॉपुलर हो गई है। इंसान रास्ता चलते कहानी सुन रहा है। पर्यवरण के दृष्टिकोण से भी डिजिटल माध्यम उपयुक्त है। इसने कहानी के स्तर को आधुनिक बना दिया है। यही वजह है कि पत्रिकाओं की हालत चिंताजनक है।”
मुख्य अतिथि प्रोफेसर रविकुमार मिश्र ने शेफालिका श्रीवास्तव की कहानी ‘दरकते रिश्ते’ और एकता अमित व्यास की कहानी, ‘स्लीपिंग पार्टनर’ की समीक्षा करते हुए कहा कि - 
“‘दरकते रिश्ते’, किसी इंसान की पूरी की पूरी ज़िन्दगी का सफर ही तो है। यह कहानी हमें सीख देती है कि आदर्श और यथार्थ के बीच हम कैसे समन्वय स्थापित कर सकते हैं। पत्नी की गौरव गाथा भी उतनी ही होनी चाहिए जितनी पति की। 
एकता अमित व्यास की कहानी, का शीर्षक ‘स्लीपिंग पार्टनर’ कहानी सुनने के बाद बहुत ही उपयुक्त लगा। इसका अर्थ वह नहीं है जो पहली बार पढ़कर लगता है। यह तो चिंतन पर बातें करता है। इस कहानी में आदिम रात्रि की महक नहीं है। इसके अनेक पक्ष हैं। कहानी रात्रि की है लेकिन इसका आरम्भ और समापन भौर से होता है। 
दरअसल यह उस खोए हुए रिश्तों को जीने और समझने की कहानी है। कहानी के पात्र मीनल, स्त्री की और नीरव, पुरुष की ऊर्जा का प्रतीक बन कर उभरे हैं।” 
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर आदित्य हरि गुप्ता ने अपने वक्तव्य में अंतराष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच का आभार व्यक्त किया और शेफालिका श्रीवास्तव की कहानी पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए कहा कि -
 “यह कहानी समाज में मनुष्य की बदलती चेतना की प्रवाहक है। यह कहानी मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है। यह मन्नू भंडारी की कहानियों की याद दिलाती है। शेफालिका जी की कहानी हमें अधिक आशावादी बनाती है। रिश्तों का दरकना संबंधों का टूटना नहीं है। यदि शालू के चरित्र का मनोविज्ञानिक प्रभाव और खुलकर आता तो कहानी और अधिक प्रभावी बन सकती थी।”
आज पढ़ी गई दोनों कहानियों में कहीं न कहीं मनुष्य के जीवन के दर्शन होते हैं। इन्हीं जीवन मूल्यों पर कुछ श्रोताओं ने भी अपने विचार रखे। इनमें कहानीकार रानी सुमिता, शिरीन भावसार, अरुणा शर्मा,और पद्मश्री शामिल थीं। 
डॉ. विनीता राहुरिकर ने अतिथियों का बहुत ही आत्मीय स्वागत किया तो वहीं युवा साहित्यकार आरती शर्मा ने अपने ही अंदाज़ में सभी का आभार प्रकट किया।  
कार्यक्रम का संचालन मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया। 
कहानी संवाद के इस कार्यक्रम में देश-विदेश से अनेक साहित्यकार, पत्रकार एवं कलाकार अंत तक मौजूद रहे। जिन्होंने दोनों कहानियों पर अपनी बात रखते हुए इस कार्यक्रम को विशिष्ट बना दिया। 

प्रस्तुति - मुज़फ्फर सिद्दीकी

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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