काव्य :
बरसात का कहर
मुंबई की क्या बात करते हो,
कोकड़ी नाला भी कम नहीं।
बरसात आते ही रास्ते डूबें,
आना-जाना फिर संभव नहीं।
स्कूल, मज़दूर, किसान सभी,
हर साल यही परेशानी है।
पुल की आस में बीत गए बरस,
यही हमारी कहानी है।
स्कूल बंद, मज़दूरी ठप,
रुक जाता है हर काम।
नेताओं के वादे तैरते रहते,
डूब जाते हैं आम इंसान।
सालों से पुल की आस लगी है,
हर बारिश देती नई निशानी।
मुंबई ख़बरों में छा जाती है,
कोकड़ी की कौन सुने कहानी?
- प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
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