काव्य :
ह्रदय में खार मत रखना
वैर तकरार मत करना
ह्रदय में खार मत रखना
अगर पाना सुकून है
बोल कटु वार मत करना
शांति हो आपके दिल में
व्यर्थ का भार मत करना
हार भी जीत करना है
जीत को हार मत करना
अगर आनंद पाना है
देह अहंकार मत करना
जगत सराय सी जानो
इसे बाजार मत करना
मनुज हीरे सा है समझो
इसे बेकार मत करना
मां ने ज्ञान प्रकाशा है
तिमिर तम तोम मत करना
नमन से मन अमन करना
चमन बेज़ार मत करना
बनाना पुल तुम्हें प्रभु से
भरम दीवार मत करना
- ऋतेश कुमार साहनी
बरेली उत्तर प्रदेश भारत
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