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काव्य : गीतिका -रामकिशोर श्रीवास्तव 'रवि',भोपाल



काव्य : 

!! गीतिका!!
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पिछले  कई   दिनों  से  वे लोग  खल  रहे  हैं।
जो स्वार्थ हेतु जुड़कर अपनों को' छल रहे हैं।
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सच्चे   डरे   हुए   हैं  झूठों   का'  बोलबाला,
गिरगिट समान  छलिये नौ-रँग बदल रहे हैं।
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बिन  पात्रता  मिले पद मिलती  यहाँ तरक्की,
जो  योग्य हैं, सड़क  पर  बेबस  टहल रहे हैं।
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धन  और  बाहुबल  का  लेकर  सदा  सहारा,
नेता  सफल   हुए  हैं, सब  हाथ  मल  रहे हैं।
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अपराध  बढ़ रहे  हैं, है अति लचर  व्यवस्था,
करके  गुनाह  मुलजिम बचकर निकल रहेे हैं।
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ईमान  मर   गया  है  विश्वास खो गया  है,
निर्मल  नजर   नहीं  है  दुर्भाव   पल  रहे  हैं।
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सन्मार्ग पर चलें क्यों?सच से न कुछ मिलेगा,
यह सोच  सतपथी से 'रवि'  लोग जल रहे हैं।।
              
- रामकिशोर श्रीवास्तव 'रवि',भोपाल(म•प्र•)
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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