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लघु कथा : शिकायतों से पहले शुक्रिया - डॉ रीटा अरोड़ा ,करनाल



लघु कथा : 

शिकायतों से पहले शुक्रिया

“आज फिर सिरदर्द है… घुटनों में भी दर्द रहता है। पता नहीं शरीर कब तक साथ देगा,” मीना ने सुबह चाय रखते हुए कहा।

पति ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराकर पूछा, “रात को नींद आई थी?”

“हाँ।”

“सुबह आँखें खुलीं?”

“हाँ, लेकिन उसका क्या?”

पति ने सहजता से कहा, “बहुत कुछ है उसका। तुम्हारे पैर रोज़ तुम्हारा भार उठाते हैं, फिर भी तुम चल पाती हो। तुम्हारा दिल कब से लगातार धड़क रहा है, कभी उसने तुमसे छुट्टी माँगी? आँखें बिना किसी कैमरे के तुम्हें दुनिया दिखाती हैं, कान मेरी आवाज़ सुनते हैं, जीभ स्वाद पहचानती है और त्वचा मेरे स्पर्श को महसूस करती है। साँस भी तो बिना तुम्हें याद दिलाए लगातार चल रही है।”

मीना कुछ देर चुप रही। फिर बोली, “लेकिन हम इन सबके लिए ईश्वर को धन्यवाद कब देते हैं?”

पति हँस पड़े, “यही तो बात है। शरीर रोज़ हमारी सेवा करता है और हम उससे रोज़ शिकायत करते हैं।”

मीना भी मुस्कुरा दी, “शिकायत करना तो जैसे मेरी आदत बन गई है।”

“और शुक्रिया?”

इस बार मीना के पास कोई उत्तर नहीं था।

वह खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई। सुबह की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने आँखें बंद कीं, गहरी साँस ली और कुछ क्षण अपनी धड़कन को महसूस किया। फिर धीरे से बोली-

*“हे ईश्वर… शायद मेरे पास शिकायतें बहुत थीं, इसलिए तुम्हारे दिए हुए चमत्कार दिखाई ही नहीं दिए।”*

पति ने कुछ नहीं कहा।

मीना ने आँखें खोलीं और आसमान की ओर देखा।

*अब शायद उसके पास ईश्वर से कहने के लिए शिकायतों से ज्यादा कुछ और था।*

 - डॉ रीटा अरोड़ा
सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर करनाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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