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काव्य : ग़ज़ल - डॉ कामिनी व्यास रावल, उदयपुर


काव्य : 

ग़ज़ल 

भारत माता की खातिर जो भी बच्चे  कुर्बान हुए
उन वीरों के ही किस्से बस सबकी आज जुबान हुए 

महफूज रहे सिंदूर हरिक नारी का इस खातिर
कितने ही भारत माता के बेटे बलिदान हुए 

जिन वीरों ने हॅंसते हॅंसते ही प्राण लुटाए हैं 
सच्चे अर्थों में उनके ही भारत में गुणगान हुए 

तोड़ के दुश्मन घुस पाये नहीं भारत की सीमाओं में 
अपने वीरों के जज्बे ही सरहद की चट्टान हुए 

अपना तिरंगा लहराता हर वक़्त रहा है शिखरों पर 
शोर्य गाथाओं को कहते तीनों रंग प्रमाण हुए 

घर में घुसकर मारी गोली हर दुश्मन की छाती पर 
ऐसे वीर सिपाही अपने हिंदुस्ताँ की जान हुए 

जीना मरना हर हाल वतन की खातिर ही अब होगा 
अपने देश के बच्चों के अब कुछ ऐसे  अरमान हुए 

*कामिनी* जन - जन का सीना ही आज इसी से गर्वित है 
भारत की  सेना के सारे पूर्ण  सफल अभियान हुए 

- डॉ कामिनी व्यास रावल
उदयपुर
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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