ad

तिरंगे की छाँव में ‘भारतमाता’ का अर्थ : बाल कल्याण एवं बाल शोध केंद्र में भावपूर्ण झंडा-वंदन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ



तिरंगे की छाँव में ‘भारतमाता’ का अर्थ : बाल कल्याण एवं बाल शोध केंद्र में भावपूर्ण झंडा-वंदन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

भोपाल। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर स्मार्ट रोड स्थित बाल कल्याण एवं बाल शोध केंद्र, भोपाल में राष्ट्रप्रेम, बाल-उल्लास और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्र परिसर में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेश पटवा के सानिध्य में झंडा-वंदन हुआ। इस अवसर पर श्री विपिन बिहारी बाजपेयी एवं श्री बी. एल. गोयल की विशिष्ट उपस्थिति रही।
तिरंगा आकाश में लहराया तो वातावरण में राष्ट्रगौरव की अनुभूति गहरी हो उठी। बच्चों के हाथों में लहराते छोटे-छोटे तिरंगे मानो देश के उज्ज्वल भविष्य की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे थे। राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और बच्चों के चेहरों पर उमंग ने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
झंडा-वंदन के पश्चात बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की मनोहारी अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुतियों में बाल-मन की सहजता के साथ राष्ट्र के प्रति प्रेम और सम्मान की गहरी अनुभूति दिखाई दी।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री सुरेश पटवा ने बच्चों को संबोधित करते हुए ‘भारतमाता’ की अवधारणा को एक मानवीय और आध्यात्मिक दृष्टि से समझाया। उन्होंने कहा—
“हम सब आत्मा स्वरूप अस्तित्व हैं। हम सबकी आत्माओं को मिलाकर जो एक ‘महात्मा’ का स्वरूप बनता है, वही ‘भारतमाता’ है।”
उनके इस विचार ने भारतमाता की पारंपरिक छवि को एक व्यापक मानवीय अर्थ प्रदान किया। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि भारत केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की चेतना, संवेदना, संस्कार और आत्मीयता से निर्मित एक विराट भाव है। देशप्रेम का वास्तविक अर्थ अपने भीतर मनुष्यता, एकता और कर्तव्य-बोध को जागृत करना है।
कार्यक्रम में श्री विपिन बिहारी बाजपेयी एवं श्री बी. एल. गोयल ने भी बच्चों को संबोधित किया और उन्हें राष्ट्र, समाज तथा अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में बाल कल्याण एवं बाल शोध केंद्र के निदेशक श्री महेश सक्सेना ने उपस्थित अतिथियों, बच्चों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। राजकुमारी चौकसे, गुंजन चौकसे, मंजू पटवा, पूरी दंपत्ति सहित अनेक साहित्यकार उपस्थिति रहे। कार्यक्रम का सुसंयोजित संचालन श्री हर्ष तिवारी ने किया।
तिरंगे की छाँव में बच्चों की खिलखिलाहट, राष्ट्रगीत की गूँज और देश के प्रति उमड़ती आत्मीयता ने इस आयोजन को केवल एक औपचारिक झंडा-वंदन न रहने देकर राष्ट्रचेतना और बाल-मन के संस्कार का सुंदर उत्सव बना दिया। समारोह का संदेश स्पष्ट था—भारत की असली शक्ति उसके नागरिकों की आत्मीय एकता में है और आने वाली पीढ़ी के मन में इसी भारत-बोध को रोपना हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय दायित्व है।

महेश सक्सेना
निदेशक, बाल कल्याण एवं बाल शोध केंद्र, भोपाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post