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लघुकथा: निमंत्रण और गुणा-भाग -डॉ. रीटा अरोड़ा , करनाल


लघुकथा: 

निमंत्रण और गुणा-भाग

“सुनिए जी, सक्सेना साहब की बेटी की शादी का कार्ड आया है।”
पत्नी ने चमचमाता भारी-भरकम डिब्बा मेज़ पर रखा तो पति ने उसे हाथ में तौलते हुए कहा, “यह निमंत्रण है या हमारी आर्थिक क्षमता की परीक्षा?”
पत्नी ने डिब्बा खोला। अंदर ड्राई फ्रूट्स और शानदार कार्ड था।
“पहले देखिए, ‘सपरिवार’ लिखा है या नहीं?”
दोनों ने कार्ड उलट-पलटकर देखा।
“नहीं लिखा।”
“तो बच्चे नहीं जाएँगे। और वेन्यू?”
“फाइव स्टार होटल।”
पति ने तुरंत मोबाइल का कैलकुलेटर खोल लिया।
पत्नी ने पूछा, “अब क्या हिसाब लगा रहे हैं?”
“डिब्बा महँगा, होटल फाइव स्टार, हम दो लोग... ₹1100 ठीक रहेगा?”
पत्नी ने आँखें बड़ी कीं, “इतनी बड़ी शादी में ₹1100?”
“तो ₹2100?”
“कुछ कम नहीं लगेगा?”
पति ने झुँझलाकर पूछा, “₹5100 कर दूँ?”
पत्नी मुस्कुराई, “हाँ, यह ठीक रहेगा।”
पति ने कैलकुलेटर बंद करते हुए कहा, “कमाल है! शादी उनकी है और बजट हमारा बिगड़ रहा है।”
शादी वाले दिन दोनों सज-धजकर पहुँचे। प्रवेश द्वार पर ही सक्सेना साहब मेहमानों का स्वागत कर रहे थे।
पत्नी ने धीरे से कहा, “लिफाफा अभी दे दीजिए, बाद में भीड़ में रह न जाए।”
पति ने ₹5100 वाला लिफाफा सक्सेना साहब को दिया।
तभी फोटोग्राफर बोला, “सर, इधर देखिए... एक फोटो!”
तीनों मुस्कुराए। कैमरे का फ्लैश चमका।
आगे बढ़ते हुए पति ने पत्नी के कान में कहा-
“चलो, लिफाफा भी दर्ज हो गया और हमारी हाज़िरी भी!”
अंदर पहुँचे तो पता चला दूल्हा-दुल्हन अभी आने वाले हैं।
एक घंटा बीता। फिर दूसरा कार्यक्रम शुरू हो गया, लेकिन वर-वधू का इंतज़ार जारी था।
पति ने घड़ी देखी, “कल सुबह ऑफिस भी जाना है।”
पत्नी बोली, “तो खाना खा लेते हैं।”
दोनों ने खाना खाया, कुछ परिचितों से नमस्ते की और घर के लिए निकल पड़े।
गाड़ी में बैठते ही पत्नी अचानक बोली-
“अरे! हम दूल्हा-दुल्हन से मिले ही नहीं। आशीर्वाद भी नहीं दे पाए!”
पति ने गाड़ी स्टार्ट की, कुछ क्षण सोचा और मुस्कुराकर बोला-
“जिन्हें आशीर्वाद देना था, उनसे मिले नहीं... लेकिन जिन्हें बताना था कि हम आए थे, उन्हें लिफाफा देकर फोटो जरूर खिंचवा आए।”
पत्नी कुछ पल चुप रही।
फिर दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए।
और पीछे सीट पर पड़ा खाली ड्राई फ्रूट का डिब्बा जैसे पूछ रहा था-
निमंत्रण शादी का था... या उपस्थिति दर्ज कराने का?
और मोबाइल के कैलकुलेटर में अंतिम संख्या अब भी 5100 दिखाई दे रही थी।

-  डॉ. रीटा अरोड़ा
सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर
करनाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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