संस्मरण : ( लंदन डायरी )
दुकान में पोस्ट ऑफिस
- विवेक रंजन श्रीवास्तव , लंदन
लंदन की गलियों में घूमना केवल इमारतों, संग्रहालयों और बाजारों को देखना नहीं है। यहां रोजमर्रा की जिंदगी में भी ऐसी छोटी-छोटी चीजें दिखाई देती हैं, जिनके पीछे किसी देश की सोच और व्यवस्था छिपी होती है।
एक दिन सड़क किनारे चलते हुए ऐसी ही एक चीज ने मुझे ठिठका दिया। सामने सामान्य-सी किराने की दुकान थी। बगल में कैफे। लेकिन उसी दुकान के ऊपर चमक रहा था लाल-सफेद बोर्ड—POST OFFICE।
पहली नजर में सवाल उठा, दुकान है या डाकघर?
उत्तर मिला—दोनों!
यह कोई अलग सरकारी भवन नहीं था। निजी दुकान के भीतर ही Post Office की सेवाएं संचालित हो रही थीं। डाक-पार्सल भेजने, बैंकिंग, नकद जमा-निकासी, बिल भुगतान, वाहन कर और courier जैसी कई सुविधाएं वहीं उपलब्ध थीं। ऑनलाइन खरीदी गई वस्तु लौटानी हो तो उसका पैकेट भी यहां जमा किया जा सकता है। यानी दूध-ब्रेड खरीदने आया ग्राहक उसी जगह अपना पार्सल भेजकर बैंकिंग का काम भी निपटा सकता है।
हमारे यहां Amazon या अन्य ऑनलाइन खरीदारी के रिटर्न की सुविधा कई बार घर से ही मिल जाती है। यहां उस रिटर्न का पैकेट लेकर मोहल्ले के Post Office या parcel point तक जाना पड़ सकता है। सुविधा दोनों जगह है, बस तरीका अलग है।
ब्रिटेन में Post Office की बड़ी संख्या में शाखाएं स्वतंत्र दुकानदारों और retail partners द्वारा संचालित होती हैं। इसका सरल सिद्धांत है,हर सार्वजनिक सेवा के लिए अलग भवन क्यों? जहां लोग पहले से जाते हैं, सेवा को वहीं पहुंचा दो। इसलिए convenience store, grocery shop या newsagent के भीतर Post Office दिखाई देना यहां सामान्य बात है।
इस व्यवस्था की जड़ें भी पुरानी हैं। ब्रिटेन में डाक व्यवस्था के शुरुआती दौर में कई Post Offices सरायों यानी inns से जुड़े थे और वहां के मालिक postmaster की भूमिका निभाते थे। तब डाक घोड़ों और यात्रियों के साथ चलती थी। आज वही विचार आधुनिक रूप में छोटी दुकानों के भीतर दिखाई देता है।
इस मॉडल का सबसे बड़ा लाभ सुविधा है। दुकान के लंबे समय तक खुले रहने से Post Office की सेवाएं भी अधिक समय तक मिल सकती हैं। Croxley Green जैसे Post Office सुबह जल्दी खुलकर रात तक सेवाएं देते हैं। यानी सुबह दूध लेने निकलिए और साथ में पार्सल भेज दीजिए। शाम को किराना लेने आइए और बिल जमा कर दीजिए।
दुकानदार के लिए भी यह व्यवस्था फायदेमंद है। Post Office ग्राहक लाता है और ग्राहक दुकान का ग्राहक भी बन सकता है। Post Office को अलग भवन और पूरा retail infrastructure नहीं जुटाना पड़ता। सार्वजनिक सेवा और निजी व्यापार, दोनों एक-दूसरे के काम आते हैं।
यहां एक तथ्य ध्यान देने योग्य है। Post Office और Royal Mail एक संस्था नहीं हैं। Royal Mail मुख्यतः डाक और पार्सल के वितरण से जुड़ा है, जबकि Post Office अपने शाखा नेटवर्क और काउंटरों पर मिलने वाली सेवाओं का संचालन करता है। दोनों के बीच व्यावसायिक संबंध जरूर है।
डिजिटल युग में इस व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है। ई-मेल और ऑनलाइन बैंकिंग ने बहुत-सी पारंपरिक सेवाओं को बदल दिया है, लेकिन हर व्यक्ति डिजिटल दुनिया में समान रूप से सहज नहीं है। बुजुर्गों और अनेक सामान्य ग्राहकों के लिए सामने बैठा कर्मचारी आज भी उपयोगी है।
लाल बोर्ड को देखकर मन में मुस्कान आई—
“सरकार ने दुकान नहीं खोली, दुकानदार ने सरकार की योजनाओं की सेवाएं खोल ली!”
मगर इस हास्य के पीछे एक गंभीर सीख है। सार्वजनिक सेवा की सफलता उसके भवन के आकार से नहीं, नागरिक तक उसकी पहुंच और सुविधा से तय होती है।
—विवेक रंजन श्रीवास्तव
लंदन
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