काव्य :
तिरंगा
गौरवशाली गाथा का,
भारत-भू की
शान है।
आस्था के ताने से बुना
,क्रांति का बाना इसकी आन है।
खालिस खादी से
निर्मित-तन
आस्था का सैलाब
बहाता
निर्झर-नीर की श्वेत
क्रांति से
हरित क्रांति तक उन्नति
,देशभक्ति,भाईचारे,
एकता की
जान है।
तीन रंगीय क्षैतिज
पट्टिका में
पहले गाँधी का चरखा
फिर चैरवेति का प्रतीक
नीलवर्णी चक्र सुशोभित
*पिंगली वैंकया* की
अभिकल्पना का
जाया ये हिंदुस्तान की शान है।
भारतीय ध्वज संहिता
में निर्देशित
गगनचुंभी शीर्ष पर सिरोधार्य ही
स्वीकार्य है,
ध्वजारोहण में स्फूर्ति
अवरोहण में गति- धैर्यता आहार्य है,
सूर्योदय से सूर्यास्त
तक ही
फहरते तिरंगे की
आन है।
पिंगली वैंकया-इन्होंने
तिरंगे की संरचना की थी।
- डा.नीलम , अजमेर
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