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काव्य : तिरंगा - डा.नीलम , अजमेर



काव्य : 

तिरंगा

गौरवशाली गाथा का,
भारत-भू की 
शान है।
आस्था के ताने से बुना
,क्रांति का बाना इसकी आन है।

खालिस खादी से
निर्मित-तन
आस्था का सैलाब
बहाता
निर्झर-नीर की श्वेत
क्रांति से
हरित क्रांति तक उन्नति
,देशभक्ति,भाईचारे,
एकता की
जान है।

तीन रंगीय क्षैतिज
पट्टिका में
पहले गाँधी का चरखा
फिर चैरवेति का प्रतीक
नीलवर्णी चक्र  सुशोभित
*पिंगली वैंकया* की
अभिकल्पना का
जाया ये हिंदुस्तान की शान है।

भारतीय ध्वज संहिता
में निर्देशित
गगनचुंभी शीर्ष पर सिरोधार्य ही 
स्वीकार्य है,
ध्वजारोहण में स्फूर्ति
अवरोहण में गति- धैर्यता आहार्य है,
सूर्योदय से सूर्यास्त
तक ही 
फहरते तिरंगे की
आन है।

पिंगली वैंकया-इन्होंने
तिरंगे की संरचना की थी।

 -  डा.नीलम , अजमेर
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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