काव्य :
गीत
तू धन्य धन्य है गुरु
तू धन्य धन्य है गुरु मेरे मेरा भाग्य संवार दिया है।
अंतिम सांसों तक याद रहे मुझे ऐसा प्यार दिया है।
मैं भटक रहा था अँधियारों में तूने पथ दिखलाया है।
क्या पाप पुण्य क्या बुरा भला मुझे सबका पाठ पढ़ाया है।
ज़ब ज़ब डोली मेरी नैया तूने पतवार दिया है।
मेरा भाग्य संवार दिया है।
दो बूंद ज्ञान की पाने को ज़ब भी यह मेरा मन तरसा।
अज्ञान की भरी दोपहरी में तू ज्ञान मेघ बनकर बरसा।
जिसमें खुशियाँ ही खुशियाँ है मुझे वह संसार दिया है।
मेरा भाग्य संवार दिया है।
मुझको अफ़सोस नहीं चाहे मैं पग पग कठिन परीक्षा दूँ।
बस यही कामना मन में है मैं भी औरों को शिक्षा दूँ।
मुरझाये न जिसके सुमन कभी मुझे ऐसा हार दिया है।
मेरा भाग्य संवार दिया है।
तू मात पिता तू सब कुछ है मैं तेरी महिमा गाऊंगा।
तूने मुझको इक कमल दिया मैं सौ सौ कमल खिलाऊंगा।
हीरे मोती भी बौने हैँ मुझे वह उपहार दिया है।
मेरा भाग्य संवार दिया है।
-कमल सक्सेना
कवि गीतकार बरेली
Tags:
काव्य
.jpg)