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काव्य : फिर नया सबेरा होगा - देवेन्द्र थापक , भोपाल


काव्य : 

 फिर नया सबेरा होगा

गुमनाम अंधेरो मे भी ,
क्या जीना यारो
चलो नई सुबह से
दोस्ती करले

सुनो हवाये क्या कहती है,
पास आकर
पक्षी चहचहाते है,
डाल-डाल जाकर      

नदी देती है,अपने पास 
आने का आमंत्रण 
मन खुश हो जाता है,
जल का संगीत,पाकर

सुबह पर्वत पर फैलती है,
सुनहरी लालिमा
प्रफुल्लित हो जाये मन
भूल जाओ रात की कालिमा  -

नये फूलों से गुलजार हो,
हरित वसुन्धरा 
बिखर जाऐ महक ,फिजां मे
मन हो जाऐ हरा भरा

यहीं भागती जिंदगी का,
ख़ुशनुमा पल होगा
और रात की कालिमा हटकर
इक नया सबेरा होगा !!
 
 - देवेन्द्र थापक , भोपाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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