काव्य :
अपनापन
जो अनजान होकर भी फिक्र करने लगे
वो है अपनापन......
जो अपने होने का झूठा स्वांग ना रचे
वो है अपनापन .......
जो अपना ना होकर भी अपना- सा लगे
वो है अपनापन .......
जो तुमसे रूठे पर फिर भी गले से लगा ले
वो है अपनापन .......
जो बिना अपने मतलब के तुम्हारे साथ रहे
वो है अपनापन ......
जो बदलते हालातों के साथ भी कभी ना बदले
वो है अपनापन ........
जो तुम्हें सही और गलत के मायने समझा दे
वो है अपनापन .........
जो तुम्हें उदास देखकर खुद भी ना हँस पाये
वो है अपनापन ........
अपना कह देने भर से कोई अपना नही होता
बार- बार जताने से भी कोई अपना नही होता
बिना कुछ बोले बस जो महसूस करा दे
वो है अपनापन .....
- हेमलता रावल , अहमदाबाद
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