काव्य :
आदिशक्ति की बात
भक्ति से शक्ति की ओर बढ़ाते
जब जब साल में आते नवराते,
प्रथम से नवम् रात्रि तक वंदन
जन जन के आराधन नवराते।
शिव और शक्ति के मिल जाने से
संसार में कुछ न असंभव रहता,
अपने इष्ट की कृपा संभव कर
अशक्त सशक्त बन आगे बढ़ता ।
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा
कूष्माण्डा यह देवी स्कंदमाता,
षष्ठ कात्यायनी सप्तकालरात्रि
महागौरी नवम् है सिद्धि प्रदाता।
अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से श्री गणेश
पर्व नवमी तिथि तक मनाते हैं,
देश देशान्तर गांव गांव शहर में
जय माता दी कह कह गाते हैं ।
शक्तिपीठ महिमा हैं बखानते
लाखों भक्त जा शीश नवाते हैं,
आद्याशक्ति की बात निराली
जब सहर्ष ही आशीर्वाद पाते हैं ।।
- शशांक मिश्र भारती
शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश
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