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काव्य : विजयादशमी - कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे


काव्य : 

विजयादशमी

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पावन बेला आई 
नौ दिनों की शक्ति साधना ने पूर्ण रूप ले लिया   
धार्मिक निष्ठा व भक्ति की पावन बेला आ गई  
तब दशमी की दिव्य सुबह ने विजय संदेश दिया  

आज दशहरे पर फिर सबने पुतला एक बनाया है
पर सोचो क्या पुतला फूंकके हम मुक्त हो पायेंगे
लकड़ी और कागज़ के भीतर रावण को सजा दिया 
जब तक मन में रावण है क्या राम भक्त कहायेंगे

आज समाज में रावण के  कई नये चेहरे दिखते हैं 
कभी बेटियाँ खतरे में होतीं कहीं नफ़रत का व्यापार 
भ्रष्टाचार जमाखोरी में सबके धरम ईमान बिक जाते
जाति-पांति के नाम पर लड़ता दिखे आज ये संसार

गरीब की थाली खाली है अमीर का बढ़ गया गुरुर 
सोशल मीडिया की दुनिया में इंसान अकेला है बैठा 
चंद पैसों की खातिर भूल गया मानव अपनों को ही 
पड़ोसी भूखा सो जाए पर खुद रील बना कर है ऐंठा 

सत्य  न्याय और प्रेमभाव से गुलशन ये महका देना 
मिटेंगी समाजिक कुरीतियाँ तभी विजय धुन बजेगी  
भुला के सारी कड़वाहटें  चलो गले लगा लें सभी को 
तभी रामराज्य की परिकल्पना सबके द्वारों पे सजेगी 

आज इस विजयादशमी पे एक नया संकल्प उठायें 
नारी का सम्मान करें व हर बच्चे को शिक्षा दिलायें 
लकड़ी के रावण से पहले सामाजिक बुराई जला दें
भेदभाव की दीवारें तोड समरसता का दीप जलायें

 - कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे, महाराष्ट्र 
8080781726
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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