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सरोकार:स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति देने में बनाया कीर्तिमान - डाॅ. चन्दर सोनाने , उज्जैन



सरोकार:

स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति देने में बनाया कीर्तिमान

मुख्यमंत्री को अन्य विभागों पर सख्ती दिखाने की है जरूरत

 - डाॅ. चन्दर सोनाने , उज्जैन

                   मध्यप्रदेश में शासकीय विभागों में शासकीय सेवक के सेवा कार्य के दौरान मृत्यु हो जाने पर उसके आश्रित परिवार को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान है। किन्तु अनुकंपा नियुक्ति देने में विभाग सामान्यतः रूचि ही नहीं लेते हैं, इसलिए एक दो नहीं बल्कि 10-10 सालों से विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के हजारों प्रकरण लंबित पड़े हैं। इस बीच शासकीय सेवक के परिवारजन अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए इधर से उधर भटकते ही रहते हंै।
मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव द्वारा सभी विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों के वर्षों से लंबित पदोन्नति के और अनुंकपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए जाने के बाद अनेक विभागों ने अपने-अपने विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों के पदोन्नति के आदेश जारी करने शुरू कर दिए हैं। किन्तु लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोई विभाग रूचि नहीं ले रहा था।
ऐसी परिस्थितियों में स्कूल शिक्षा विभाग ने साहस दिखाया और एक माह के अंदर 950 अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण कर दिया। हाल ही में मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मृतक शासकीय सेवक के आश्रित परिजनों को नियुक्ति आदेश सौंपे। इससे बरसों से बाट जो रहे परिवारजनों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के पिछले 10 सालों से भी अधिक से 1250 प्रकरण लंबित थे। ऐसे हालात में स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण आयुक्त श्री अभिषेक सिंह ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के लिए एक योजना बनाई। लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए प्रदेश में पहली बार प्रदेश के सभी संभागीय संचालकों को लंबित प्रकरणों के साथ भोपाल बुलाया गया। और सिर्फ एक दिन में 400 नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए। अगले दिन 190 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस प्रकार मात्र दो दिन में ही 590 लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निपटारा कर दिया गया।
चूँकि अनुकंपा नियुक्ति पर निर्णय लेने का अधिकार संयुक्त संचालकों के पास है, इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति की वरिष्ठता सूची और विभाग में रिक्त पदों की वर्गवार जानकारी साथ लाने के निर्देश भी दिए गए थे। अनुकंपा नियुक्ति प्रभारी के साथ डेटा एन्ट्री आॅपरेटर और कम्प्यूटर आॅपरेटर को भी पूरे रिकाॅर्ड के साथ बुलाया गया था। इस प्रकार स्कूल शिक्षा विभाग ने दो दिन में जारी नियुक्ति ओदश के बाद भी इस प्रक्रिया को जारी रखा और करीब एक माह में ही उन 950 अनुकंपा नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। कुल लंबित 1250 प्रकरणों में से शेष बचे प्रकरणों के निराकरण की कार्रवाई भी सतत जारी है।
जहांँ स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने विभाग में एक माह में ही अनंुकपा नियुक्ति के 950 प्रकरणों का निराकरण कर दिया, वहीं सवाल ये उठता है कि अन्य विभाग क्या कर रहे हैं ? अन्य विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के 16,000 से 18,500 प्रकरण लंबित हंै। सबसे अधिक लंबित प्रकरण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में है। इस विभाग में 2500 से 3000 प्रकरण लंबित है। पुलिस एवं गृह, पीएचई, जलसंसाधन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 2000 से 2500 प्रकरण लंबित है। राजस्व, नगरीय प्रशासन और ऊर्जा विभाग में ही 1500 से 2000 प्रकरण लंबित है। इसी प्रकार लोक निर्माण, वन एवं अन्य समस्त विभागों में 4500 से 5000 प्रकरण करीब एक दशक से भी अधिक समय से अटके  पड़े हुए हैं।
जब प्रदेश के समस्त विभागों में स्कूल शिक्षा विभाग अपने यहाँ लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण कर कीर्तिमान स्थापित कर सकता है, तो यहाँ सवाल यह उठता हैं, कि अन्य विभाग अब तक क्या कर रहे है ? किसी भी विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण के लिए रूचि नहीं दिखाई है। जबकि हर एक विभाग में 10 साल से अधिक समय से मृतक शासकीय सेवक के आश्रित परिवारजन अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने सभी सरकारी विभागों में पदोन्नति प्रकरणों के निराकरण के सख्त निर्देश देने के बाद सभी विभागों में तेजी आई और वे इस दिशा में लगातार काम कर भी रहे है। किन्तु अनुकंपा नियुक्ति में छााई उदासी को दूर करने के लिए एक बार फिर मुख्यमंत्री को अन्य समस्त विभागों पर सख्ती दिखाने की आवश्यकता है, ताकि वे भी अपने-अपने विभागों में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का स्कूल शिक्षा विभाग की तरह निराकरण कर सके।
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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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