काव्य :
आरोग्य देवता
भगवान धन्वन्तरि
आयुर्वेद प्रवर्तक हैं
सृष्टि को निरोगकर्ता
समुद्र मंथनोत्सव हैं।
दीवाली से दो दिन पूर्व
जन्म दिवस है आता,
चार भुजाओं का वैभव
जग अमृतकलश पाता।
इनकी प्रिय धातु पीतल
धनतेरस को घर लाता,
आरोग्य देवता महान
काशी कालजयी बनाता।
वैदिक काल में अश्विनी
पौराणिक धन्वन्तरि हुए,
एक के हाथ में मधुकलश
यह अमृतकलश लिए।
रोगों के रक्षक बन गए
श्री विष्णु का अंश माना,
महाभारत में कश्यप तक्षक
ब्रह्मवैवर्तपुराण इन्हें बखाना।।
- शशांक मिश्र भारती
शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश
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