अवनि से प्रेम की अनुभूति है "निसर्ग गाथा" - त्रिपाठी
संध्या सर्वटे छायाचित्र संग्रह "निसर्ग गाथा" का हुआ विमोचन
सागर। वरिष्ठ लेखिका व कवयित्री डाॅ.संध्या सर्वटे के छायाचित्र संग्रह "निसर्ग गाथा" का
विमोचन रविवार को श्यामलम द्वारा आदर्श संगीत महाविद्यालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार टीकाराम त्रिपाठी ने की. मुख्य अतिथि शासकीय कन्या महाविद्यालय बीना की सेवानिवृत प्राध्यापक डाॅ.संध्या टिकेकर तथा सारस्वत अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुश्री डॉ.शरद सिंह रहीं.
सुश्री डाॅ.संध्या सर्वटे की यह पुस्तक "निसर्ग गाथा" प्रकृति चित्रण के छायाकंन की चित्रावली के संग मनोभावों का सुंदर संकलन है,जिसमें विगत पच्चीस वर्षो में मोबाइल से खींचे चित्रों का संकलन किया गया है, इसकी भूमिका एवं समीक्षा ऊपर उल्लिखित विद्वानों द्वारा की गयी है। स्वागत भाषण संस्था अध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने देते हुए इस पुस्तक के विमोचन की भूमिका का आकर्षण कैसे बना इस पर चर्चा की। अतिथि-द्वय ने डाॅ.संध्या सर्वटे के प्रकृति प्रेम तथा निस्पृह भावों को श्रेष्ठ बताया एवं इस अनूठे कार्य की सराहना की। अध्यक्षता कर रहे टीकाराम त्रिपाठी ने पुस्तक को लेखक की श्रेष्ठ मनोवृत्ति तथा प्रकृति प्रेम की सराहना करते हुए कहा कि चित्रों को पुस्तक बनाकर प्रकृति को श्रेष्ठ मुकाम देना और उस पर वार्ता आयोजित करना निश्चित ही अवनि से प्रेम की अभिव्यक्ति है। कार्यक्रम में सरस्वती वंदना का पाठ श्रीमती निशा तिवारी ने तथा गणेश जी की वंदना का स्वरचित गीत डाॅ.नलिन निर्मल ने प्रस्तुत किया। सुश्री डाॅ.संध्या सर्वटे ने अपने वक्तव्य में बताया कि कैसे यह छाया चित्र खींचना तथा संकलित कर पुस्तक का रूप देना व मनो भाव को उकेरने पर बात रखी. उनका सम्मान शाल,श्रीफल, माला तथा सम्मान पत्र देकर संस्था श्यामलम द्वारा किया गया। सम्मान पत्र का वाचन आर के तिवारी ने किया तथा संस्था की ओर से उमाकांत मिश्र, कपिल बैसाखिया,संतोष पाठक, अंबिका यादव,श्रवण श्रीवास्तव, अभिनंदन दीक्षित,प्रदीप पाण्डेय, मुकेश तिवारी,सुरजीत सिंह अजनबी,सर्वेश्वर उपाध्याय आदि के द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम का सुचारु संचालन प्रोफेसर अमर जैन के द्वारा किया गया।
आभार प्रदर्शन वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर डाॅ.छाया चौकसे ने माना।
इस अवसर पर प्रोफेसर के. एस. पित्रे, लक्ष्मी नारायण चौरसिया,कपिल बैसाखिया, मुकेश तिवारी,प्रदीप पांडेय, प्रभात कटारे, अमित आठ्या, सुरजीत सिंह, कैलाश तिवारी, एम शरीफ, आर आर पांडेय, ज ल राठौर, के एल तिवारी अलबेला,मुकेश निराला,पी आर मलैया,वीरेंद्र प्रधान,पेट्रिस फुसकेले, पुष्पेन्द्र दुबे, शरद कुमार सूर्यवंशी,सौरभ दुबे सहित डॉ नीलिमा पिंपलापुरे, अंजली सर्वटे, डॉ शोभना पित्रे , विशाखा देव, माधुरी पंडारकर, संगीता हलवे, स्वाति हलवे, रंजना वाखले , सुषमा अन्वेकर, सुप्रिया नवाथे, मीनाक्षी सप्रे, सुरभि ओखदे, नीलिमा गुर्जर, स्वाती गोडबोले, अर्चना ओखदे, रुकमणी केसरवानी, अचला गुर्जर, विभा दुबे की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही.
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