विनयान्जली
आचार्य विद्यासागर और आचार्य दौलत सागर जी को
करते हम नमन उनको
जिन्होने छोड़ा अपना शरीर है
रूह की खुशबु उनकी
फैली है चारों ओर
अह्सास सभी ये करना
मार्ग उनके पर चलकर
अमन और शान्ति फैलाना
गये यही सीख वो देकर
शीत के दंश भी झेलना
ग्रीष्म का आतंक भी सहना
सम भाव से रहकर
सिखाया जीना सभी को
भारत को भारत ही कहना
इसे इन्डिया नही बनाना
संस्कृति और संस्कार
अपने नहीं छोड़ देना
हिन्दी भाषा को हमेशा अपनी राष्ट्र भाषा कहना
अहिंसा सत्य की राह चलना
कष्ट से कभी न घबराना
देकर सीख ये सबको
गुरूवर हुए मोक्ष गामी
विद्या के सागर को करे हम कोटि कोटि वन्दन
करे हम कोटि कोटि वन्दन
चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर
मंदसौर मध्यप्रदेश
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