ग्वालियर । आज दिनांक ९ जुलाई को महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित गोपालकृष्ण पुराणिकजी की 125वीं जयंती पर पुष्पांजलि एवं वृक्षारोपण का आयोजन पंडित गोपालकृष्ण पुराणिक शोध संस्थान, शिवपुरी लिंक रोड ग्वालियर में किया गया !
सुदूर जंगल क्षेत्र पुराना छर्च में जन्मे पंडित गोपाल कृष्ण पुराणिक जी ने ना केवल पोहरी को भारत और विश्व में पहचान दिलाई अपितु उन्होंने शिक्षा, ग्राम विकास की परिकल्पना को साकार करते हुए ग्वालियर रियासत के लोगों की जीवन में स्वतंत्रता,स्वाभिमान एवं स्वावलंबन की अलख भी जगाई। उन्होंने ग्रामीण पत्रकारिता क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किया, वर्ष 1938 में प्रकाशित होने वाली “The Rural India” पत्रिका संपूर्ण जीवन संपादक रहे, उसको विश्व के कई देशों तक पहुंचाया। पत्रिका में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महान व्यक्तियों द्वारा अपने लेख भेजे जाते थे। गुलामी के दौरान भारत देश की स्वतंत्रता आंदोलन में “The Rural India” पत्रिका ने एक महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका अदा की।
महान संत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद एवं ग्रामीण पत्रकारिता के जनक पंडित गोपालकृष्ण पुराणिक जी की 125वीं पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि सभा में कार्यक्रम के संयोजक एवं गोपाल कृष्ण जी के परिवार से संबंधित संदीप बंधु द्वारा पंडित जी का जीवन वृतांत प्रस्तुत किया गया ! उन्होंने बताया गया कि जब देश में अंग्रेजों का शासन था उस समय भारतीयों को अपनी बात कहने का अधिकार तक नहीं था, ऐसे समय में अपने जीवन की परवाह ना करते हुए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिका “The Rural India” के प्रकाशन कार्य पोहरी जैसे छोटे गांव से किया गया एवं छापने एवं प्रकाशन के लिए नाना चौक , मुंबई में कार्यालय की स्थाई व्यवस्था की गई। इस पत्रिका में महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, पट्टाभि सीतारमैया, विजयलक्ष्मी पंडित, गोविंदवल्लभ पंत, जवाहरलाल नेहरू, काका कालेलकर, हरिभाऊ उपाध्याय, भारतन कुमारप्पा जैसे चर्चित नेता लेख लिखते थे। इसके अलावा अन्य देशों के विद्यजन जैसे मिस्टर हूवर, एसटी मोजेज, राल्परिचर्ड कैथल, एव्ही मैथ्यू भी अपने लेख ‘रूरल इंडिया’ में लिखा करते थे, पूर्व समाजवादी कांग्रेसी किसान नेता प्रोफेसर एनजी रंगा एवं भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी भी अनेकों वर्ष तक “The Rural India” (वर्ष 2000-2005तक )पत्रिका के संचालक मंडल के अध्यक्ष रहे थे, यह पत्रिका ना केवल भारत देश में अपितु अमेरिका , यूरोप एवं नेपाल, वर्मा, भूटान आदि देशों तक पहुंचा करती थी।
उन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में राजनीतिक एवं रचनात्मक रूप से जो सहयोग एवं अपना जीवन समर्पित किया वह आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का भंडार है। पंडित जी द्वारा पोहरी में आदर्श विद्यालय का संचालन हो अथवा स्वाबलंबी विद्यार्थियों की फौज तैयार करना अथवा आदर्श सेवा संघ के माध्यम से सम्पूर्ण ग्वालियर चंबल क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध करना, इन क्षेत्रों में पंडित जी के द्वारा कार्य किए गए वह भी तब जब यह देश अंग्रेजों के अधीन होकर गुलाम कहलाया करता था, परंतु गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए पंडित गोपालकृष्ण जी की विचारधारा एवं उनकी सोच काफी क्रांतिकारी एवं प्रगतिशील थी, जिसके दम पर उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्वतंत्रता आंदोलन में अपने जीवन को समर्पित कर दिया, सर्वस्व निछावर कर दिया। उस समय की स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को वह न केवल छर्च और कूनो के जंगल में रहने की व्यवस्था करवा देते बल्कि अपने आदर्श विद्यालय में भी क्रांतिकारियों को छद्म नाम से शिक्षक बनाकर रखते थे ! दिल्ली कांस्पीरेसी केस”१९२८-३२ में उनका एवं आदर्श विद्यालय का नाम आने के बाबजूद, उन्होंने अपने क्रांतिकारी कार्य गोपनीय तथा व्यापक रूप से यथावत जारी रखे !
पण्डितजी ने पोहरी में ग्रामीण विकास एवं स्वदेशी स्वरोजगार मूलक कार्यों को प्रारंभ कराया जिसमें देश-विदेश के छात्रों को खादी निर्माण कागज निर्माण माचिस उद्योग मधुमक्खी पालन आदि कई तरह की कला -कौशल को सिखा कर उन्हें स्वावलंबी बनाया जाता था। देश में युवाओं को रोजगार परक शिक्षा की आवश्यकता है जिससे बढ़ती बेरोजगारी को रोका जा सके। युवाओं को ऐसी शिक्षा दी जाए जिससे वह स्वावलंबी बने।
पुष्पांजलि सभा में उपस्थित जनों द्वारा पंडित गोपालकृष्ण जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए जाकर उनकी स्मृति में वृहद् वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया !।
प्रेषक, मुकेश तिवारी ,वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर
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