डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के मानवविज्ञान विभाग ने मनाया अपना 68 वॉ स्थापना दिवस
सागर । किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शैक्षणिक स्तर एवं गुणवत्ता शोध से की जाती है, उक्त उद्गार मुख्य अतिथि प्रो. ममता पटेल, प्रभारी डीन व्यवहारिक अध्ययनशाला, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्यप्रदेश ने मानवविज्ञान विभाग के 68वें स्थापना दिवस के उद्घाटन सत्र में सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सागर विश्वविद्यालय का मानवविज्ञान विभाग मध्य भारत का एक मात्र ऐसा अद्वितीय विभाग है, जिसने अपने पहचान शैक्षणिक एवं शोध में अन्तराष्ट्रीय स्तर पर की है। मानवविज्ञान विभाग के मानवविज्ञानी शोध के क्षेत्र में बेहतर प्रयास कर रहे हैं। विभाग की गतिविधियो की सराहना करते हुए कहा कि सागर विश्वविद्यालय निश्वित रूप से शोध से आने वाले परिणाम मानव के विकास के क्षेत्र नये आयाम दर्ज करेगें।
स्थापना समारोह के प्रथम मुख्य वक्ता प्रो. बी. के. श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग, ने कहा कि पूर्व मानव को में पहला दार्शनिक मानता हूँ और अच्छा स्वास्थ्य का उपहार हम सभी को जीवित रखता है एवं कृतज्ञता ही संपन्नता है। हम सभी को एक दूसरे को कृतज्ञ रहना चाहिए। हम सभी को नई चीजों से घबराना नहीं चाहिए, जो पूर्वजो से लेकर आये उसे एक धरोहर की तरह आने वाली पीढ़ी को देना है।
स्थापना समारोह के द्वितीय मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कुमार जैन, अधिष्ठाता शैक्षणिक अध्ययनशाला, ने अपने व्याख्यान में कहा कि सामाजित व्यवहार तीन प्रकार है- पहला मस्तिष्क-व्यवहार, समाज-व्यवहार एवं वैश्विक परिवेश। इन विषयों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रगति के लिए देश तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि वैश्विक दृष्टि रखनी चाहिए। आपके द्वारा किये गये शोध कार्यों का प्रकाशन प्रेस के द्वारा दूनियां तक पहुँचाना और अपने अंदर नम्रता रख आगे बढ़ते रहना चाहिए।
कार्यकम प्रारंभ में प्रो. अजीत जायसवाल, विभागाध्यक्ष मानवविज्ञान विभाग ने रूप रेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानववैज्ञानिक सिर्फ एक ही दिशा में शोच नहीं करता, अपितु यह सारे परिप्रेक्ष्य को सम्बोधित करता है। हमारे विभाग का शैक्षणिक इतिहास बहुत सराहनीय रहा है। हमारे शोधार्थी विश्व पटल पर अपनी छवि बनाने में सक्षम रहे हैं। आज के समय में इस विषय के छात्रों के पास बहुतायत साधन और अवसर उपलब्ध है, जिनका उपयोग करके इस विभाग को उच्च स्थान देने में अपना सहयोग दे सकते हैं। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो के. के. एन. शर्मा ने धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग को स्थापित करने में विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान है, जिन्होंने आकादमिक ईमानदारी से विभाग की नींव रखी, जिसको आगे बढ़ाना शिक्षकों एवं शोधार्थियों का नैतिक दायित्व है। अतः हमें अपना कार्य ईमानदारी से करना होगा।
द्वितीय सत्र में विभागीय परिसर में पौधारोपड़ किया गया, जिसमें मुख्य रूप से प्रो. राजेन्द्र यादव, डॉ. आशुतोष, डॉ. हिमांशु, डॉ. विवेक जायसवाल, डॉ. संजय शर्मा, डॉ. सोनिया कौशल, डॉ. विजया सुंदरी, डॉ. अवधेश कुमार के साथ शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
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