वो बचपन की बारिश
बचपन की बातें चाहे पुरानी
मौसम बारिश की वो कहानी
रिमझिम सी यादों में बरसती
पहली पहली सावन की बूंदे
सोंधी खुशबू माटी की महके
क्यों न विदाई ग्रीष्मा को दे दें
नहालो बच्चों, झट दादी बोली
अमृत बूंदों की है बात निराली
पानी में नाचो,रोग यूँ भगाओ
झरने नदियाँ पोखर उफनते
गलियों में बच्चे हैं छपछपाते
कागज़ की कश्तियाँ हैं चलाते
चाची के चूल्हे पे चढ़ी कढ़ाई
पालक पकोड़े गुलगुले भाई
चटनी चटपटी है माँ ने बनाई
- सरला मेहता , इंदौर
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काव्य
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