काव्य :
लड़की हूँ पर कमजोर नहीं
लड़की हूँ, पर कमजोर नहीं। ताकतवर हूँ ,मुँहजोर नहीं।
कितने ही स्वप्न सुनहरे, मेरी इन आंखों में पलते हैं।
दिन रैन हमेशा साथ मेरे, साये की तरह से चलते हैं।
जूडो मार्शल आर्ट सीख, खुद को मजबूत बनाऊँगी।
और अन्य महिलाओं को भी, यह कौशल सिखलाऊँगी।
समय आजकल बहुत बुरा है, कोई नहीं सुरक्षित है।
दरिंदों के खौफ से, हर नार यहाँ आतंकित है।
बलात्कारी बैखौफ घूमते, पीड़िता डरी सहमी जाती।
न्याय नहीं मिल पाता उसको, सारी उम्र गुजर जाती।
इसीलिए बालिकाओं को यह उपाय अपनाना है।
अपनी रक्षा खुद करनी है, उनको यह समझाना है।
आसमान छूना चाहती हैं, लेकिन डरती रहती हैं।
आसमान छूने की चाहत, मन में घुटती रहती है।
उन्हें यही समझाना है कि इस विद्या को सीखो तुम।
कायर और डरपोक नहीं,एक सबल समाज बनाओ तुम।
अगर *आसमां को छूना है*, आत्मरक्षा के उपाय सीखने होंगे।
स्वयं सीखकर अपनी अन्य बहनों को भी सिखलाने होंगे।
बहन बेटियों उठो, तुम्हें इतिहास नया अब लिखना है।
अपने पंखों को उड़ान दो, तुम्हें आसमान को छूना है।
-राधा गोयल, विकासपुरी,दिल्ली
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