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काव्य : गजल -डॉ. विजय कुमार सिंघल,आगरा


 गजल

दोहा गीतिका


मोहब्बत की दुकान का मत पूछो कुछ हाल

ईर्ष्या द्वेष घमंड और नफ़रत का है माल 


कहने को कुछ है नहीं, समझ न आये ख़ाक 

कुंठा में नित खीझकर करता सिर्फ़ बवाल 


संविधान ले हाथ में जिसका नहिं कुछ ज्ञान

चीख चीखकर कर रहा संसद बीच धमाल


रेंक रेंककर गधे सब झाड़ दुलत्ती खूब 

घोड़ों की समता करें देखा यही कमाल 


गरिमा संसद भवन की तार-तार कर रोज

उछल कूद ही कर रहा बार-डांसर-लाल 


-- डॉ. विजय कुमार सिंघल,आगरा

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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