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काव्य : वृक्ष होते हमारी राष्ट्र धरोहर -चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर मंदसौर


काव्य :  वृक्ष होते हमारी राष्ट्र धरोहर


धरोहर होती हमारी अपनी

जी जान लगाकर बचाते 

मारकाट मचती भाई भाई मे 

मात पिता को भी न बक्षते 

राष्ट्र की है धरोहर पेड़ 

कटे या सूखे हमे क्या 

क्यों करे परवाह हम पेड़ों की 

जंगल काटकर बने इमारत 

या लगे कारखाना 

सड़क के लिए ही 

क्यों न काटे जाय 

हम विकास जो कर रहे है 

हमारे बड़े बुजुर्गों ने लगाये थे 

पाल-पोस कर किये थे उन्हे बड़ा 

पर हमे क्या फायदा उससे 

क्या हमारी पूंजी मे वृद्धि होगी 

घेरकर बैठे है जगह 

कर रहे विकास को अवरुद्ध 

कट जाने दो इन्हे 

ठंडक के लिए कूलर एसी पंखे है 

आक्सीजन भी कृत्रिम बना लेंगे 

पर्यावरण की क्यों सोचे 

पैसे होंगे तो सब पा लेंगे 

हाँ हर साल  लगाते है

हम जोर शोर से पेड़ 

अखबार की सुर्खियां बनने 

परवरिश का समय कहाँ 

अगले ही दिन से भूल जाते

पानी तक पिलाना 

क्योंकि पेड़ होते राष्ट्र की धरोहर 

हमारी धरोहर होती तो

सहेज कर रखते 

हिम्मत न होती किसी की

एक डाल भी तोड़ने की 

फिर यो हर वर्ष 

लगाने न पड़ते पेड़। 


- चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर

   मंदसौर मध्यप्रदेश

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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