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काव्य : ऐ ,सुबह तू जल्दी चली आना -ऋतु दीक्षित , वाराणसी, उत्तर प्रदेश


 

ऐ ,सुबह तू जल्दी चली आना


उम्मीदों के शहर में 

विश्वास का दीपक जलाना,

हटा देना तुम धुंध की चादर 

ऐ, सुबह तू जल्दी चली आना||


भूल - भुलैया के इस जीवन में 

कितने अंधेरे मोड़ है,

भटक रहा मैं इधर- उधर

अब ना तुम मुझको भटकाना,

ऐ, सुबह तू जल्दी चली आना || 



अंतरद्वंद की वेदना से 

घुटने लगा है अब जीवन ,

टूट ना जाए सासों की लड़ियां 

दर्द को मेरे तुम सहलाना ,

ऐ ,सुबह तू जल्दी चली आना|| 


बड़ा गहरा भंवर है 

और कश्ती भी पुरानी है,

लहरे भी अपना खेल दिखाती 

इन लहरों से तुम मुझे बचाना,

ऐ ,सुबह तू जल्दी चली आना||


तमन्ना थी कुछ कर गुजरने की 

सुनी तस्वीर में रंग भरने की 

खाली रह गया तकदीर का पन्ना ,

आके पन्नो पे कुछ लिख जाना 

ऐ ,सुबह तू जल्दी चली आना ||


पके फसल पाएं कैसे 

जब कच्चा ही बीज बोया था,

सारी हसरते जल गई मेरी 

अधूरी हसरतों को पूरी कर जाना

ऐ,सुबह तू जल्दी चली आना|| 


आरजूओं का अंत नहीं 

अब मेरे कोई संग नही,

नितांत सुना है मेरा आकाश 

चांद तारों से तुम भर जाना ,

ऐ, सुबह तू जल्दी चली आना||


ओढ़ अभिलाषाओं की चादर 

पंछी बन मैं उड़ चला ,

पर काटे है मेरे ही अपने 

ना किसी को तुम बताना ,

ऐ, सुबह तू जल्दी चली आना|| 


-ऋतु दीक्षित , वाराणसी, उत्तर प्रदेश

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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