काव्य :
तमस है यह माया
तमस है यह माया-
लक्ष्य तेरे जन्म का है
तेरी ज्योतित काया।
पांच इन्द्रिय ज्ञान पायें-
सार जीवन का समेटे,
पांच कर्म के पाए।
मोह के बंधन हटा-
जड़-जगत से देह के
अभिमान की जकड़न हटा।
कर लिया विश्राम-
जन्म सफल, प्रकाश से
अब है मिलन अभिराम।
- डॉ. सुधा कुमारी, नई दिल्ली
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