चिंता आनंद को छीन लेती है
इटारसी । नर्मदापुरम ग्रामीण क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ राज्य आनंद संस्थान, नर्मदपुरम की टीम द्वारा एक दिवसीय "अल्पविराम सत्र" इटारसी के एसडीएम प्रतीक राव और तहसीलदार सुनीता साहनी के मार्ग दर्शन मे संचालित किया गया। सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वल और ईश वंदना से कार्यक्रम शुरू हुआ| कार्यक्रम के पहले सत्र मे उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से उनके लिए आनंद क्या है प्रश्न से आगे बढते हुए राज्य आनंद संस्थान का परिचय विस्तार से मास्टर ट्रेनर गणेश कनाडे के द्वारा दिया गया और उनके द्वारा हमारे रिश्ते के उपर सत्र लिया गया जिसमे उन्होंने एक रिश्तों के मेप की मदद से प्रकाश डाला कि हमारी जिंदगी में अगर हमारे रिश्ते किसी के साथ बिगड़े हुए हैं तो उस विचार के रहते हम आनंद की प्राप्ति नहीं कर सकते इसलिए हमें अपने रिश्तों को आनंद की प्राप्ति के लिए सुधारते हुआ आगे बढ़ना चाहि| रिश्तों का चार्ट बनाते हुए उन्होंने उपस्थित लोगों को उनके रिश्ते के नजदीक ले जाते हुए अनुभव कराया कि उनके खुद के रिश्ते किसके साथ अच्छे हैं और किसके साथ उनके बुरे हैं, बुरे रिश्तो को समझते हुए उनके सुधार पर कार्य किया जाए ताकि जीवन आनंद की प्राप्ति हो सके| तत्पश्चात कार्यक्रम समनव्यक और मास्टर ट्रेनर सुमन सिंह द्वारा चिंता का डेरा और प्रभाव का दायरा के ऊपर सत्र लिया गया इसमें उन्होंने बोला कि हमारी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक स्तर की जो भी चिंताएं हैं उनको समझते हुए उस समस्या को समाधान में बदलने के लिए मेरे द्वारा क्या प्रयास रहेगा यह समझना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर समस्या मेरी है तो समाधान भी मेरे पास होना चाहिए एक नियम है जिस चीज को हम ज्यादा सोचते हैं वही चीज हमारी जिंदगी में बढ़ती है तो अभी हमको समझना है कि हम चिंता का दायरा अपनी जिंदगी में ज्यादा बढ़ाते हैं तो वही बढ़ेगी और समाधान को लेकर जायदा सोचेंगे तो समाधान बड़ेगा| अपने जीवन को चिंता के चलते चीता की ओर न लेकर जाए हर समस्या का समाधान प्रकटी रहने दिया है उसकी गंभीरता से समझते हुए उसको निपटाते हुए हम जिंदगी में आगे बढ़े ताकि आनंद की प्राप्ति करके अपनी जिंदगी को सहज और सरल तरीके से जी सके|आज के भागते समय मे लोग चिंता मे अपना मानसिक संतुलन खो रहे है कैसे वो अपनी चिंता को अपने प्रभाव के दायरे मे लाकर उसके समाधान पर काम करके चिंता मुक्त हो कर अपने आनंद को बढ़ा सकते है| चिंता हमको आनंदित होने से रोकती है इसलिए बहुत जरुरी है कि हम रोज शांत समय ले और अपने आप से बाते करना शुरू करे ताकि हमको खुद ही अपनी अच्छाइयाँ और बुराइयाँ पता चल सके और हम उन पर काम कर सके| प्रशिक्षण के समापन को बहुत ही सुंदर गाना "किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार" के साथ किया गया| सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस प्रशिक्षण की सराहना की| आज के अल्पविराम सत्र संचालन में मास्टर ट्रेनर सुमन सिंह, गणेश कनाडे, आनंदक सहयोगी वैंकेट चिमनिया, दीपक मालवीय, आशा रघुवंशरघुवंश और सुपरवाइजर रेखा की सहभागिता रही।
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