ad

बुंदेलखंड के प्रथम जैनाचार्य विरागसागर जी महाराज को विनयांजलि समर्पित


 बुंदेलखंड के प्रथम जैनाचार्य विरागसागर जी महाराज को विनयांजलि समर्पित

यह केवल जैन समाज नहीं अपितु विश्व जगत के लिये अपूर्णीय क्षति- विशाल जैन 

 ललितपुर। बुंदेलखंड के प्रथम जैनाचार्य गणाचार्य विरागसागर महाराज ने जालना महाराष्ट्र में 4 जुलाई के सुबह 2:30 बजे समाधि पूर्वक देह त्याग किया तो सकल जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गयी। जब सुबह धर्माबिलंबियों को यह शोक समाचार मिला तो सभी हतप्रभ रह गये सुबह सूर्य निकलने से पहले ही एक सूर्य का अस्त हो गया। चतुर्दशी को तालबेहट के वासूपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में विनयांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तामर पाठ के साथ 48 दीपक प्रज्वलित कर विनयांजलि समर्पित की। मंगलाचरण सौम्या जैन ने किया। इस मौक़े पर अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक विशाल जैन पवा ने कहा यह केवल जैन समाज नहीं अपितु विश्व जगत के लिये अपूर्णीय क्षति है। 18 फरवरी को आचार्य विद्यासागर जी महाराज के देवलोक गमन की घटना से अभी समाज उबरा भी न था की आज सुबह जो हुआ उसने पुनः सकल समाज के मन में एक गहरा घाव कर दिया है। बृद्ध संतों की सेवा का जो अद्भुत और अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया है वह सभी के लिये प्रेरणास्रोत है। पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि गणाचार्य विराग सागर महाराज ने 350 से अधिक मुनि, आर्यिका, ऐलक, क्षुल्लक एवं क्षुल्लिका को दीक्षा प्रदान की। जो सम्पूर्ण देश में धर्म प्रभावना कर जैनागम को जन-जन तक पहुँचाने एवं मोक्ष मार्ग का उपदेश दे रहे हैं। वहीं शुक्रवार को पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में समाज के सभी गुरुभक्तों ने आचार्य श्री सानिध्य के संस्मरण सुनाते हुए भावाव्यक्ति प्रकट कर विन्यांजली समर्पित की एवं वक्ताओं ने गणाचार्य विरागसागर महाराज के आदर्श जीवन चारित्र एवं उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस मौक़े पर सकल दिगम्बर जैन समाज के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post