काव्य :
मित्रता दिवस
आज हम पैड़ से दोस्ती कर लें
तोता,मैना,चिड़िया,गिलहरी
मोर,कबूतर भी दोस्त बनेंगे
रोककर रखेंगे जब पैड़ पानी
नदी,ताल, तलैया भरेंगे
आज जो नंगे है पर्वत शिखर
कल हरियाली से आच्छादित होंगे
पानी को सब यों ना तरसेंगे
सारी प्रकृति से ही जब दोस्ती होगी
इन्द्र देव भी कैसे नाराज बैठेंगे
मेह की बारात लेकर
धरा पर वो भी बरसेंगे
जरूरत है दोस्ती
सिर्फ एक पैड़ से करने की
- चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर मंदसौर मध्यप्रदेश
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