माइक्रो व्यंग्य
खिचड़ी से खट्टी डकार से खट्टी डकार
ट्रिन.. ट्रिन....
-सर फोन बज रहा है उठा लूं ?
- ये लीजिए नागपुर हेड आफिस से है।
- क्यूं भाई, काहे और लाई लुटवाने पर तुले हो। बुलडोजर चलवाकर चलवाकर कर तुमने 400 पार की लाई लुटवा दी न....
भगदड़ मच गई तब समझ में आया, अभी भी नहीं चेते तो फिर और ऊपर वाली कुर्सी की आस नहीं करना, लुंगी लगाकर मीटिंग करने में कुछ नहीं होगा। अगले चुनाव के लिए कल से ही काम चालू कर दो, कल ही चले जाओ और किसी दलित के यहां खाने का नाटक करना चालू कर दो।
-पर सर.. पिछली बार चुनाव के पहले जब हम दलित के घर खाना खाने गए थे तब आपने डांट लगाई थी, आपने कहा था- 'नेता लोग दलितों के घर खाना खाने की ड्रामाबाजी अब बंद करें, पब्लिक है सब जानती है।'
- पिछली बार जो कहा था वो भूल जाओ, पिछली बातें तो जनता भी भूल चुकी है। कल तुरंत जाओ और जाकर दलित के घर खाना खाने का नाटक कर लो, ताकि जनता के बीच मेसेज चला जाय कि हम उनका कितना ध्यान रखते हैं।
कल आया, वे राजधानी से उड़नखटोले में उड़े और मुंह लटकाए बेमन से दलित की झोपड़ी में घुस गए। बाहर पचासों लाख की कारें लाइन लगाकर खड़ी होने लगीं। स्कूल की छुट्टी हो जाने से गांव भर के गरीबों के बच्चे कारों का काफिला देखने इकठ्ठे हो गए। किसी गरीब के घर के सामने अचानक इतनी सारी मंहगी कारों के काफिले देखकर भीड़ जुटनी स्वाभाविक है।
नेता जी लुंगी लगाए परछी में पालथी मारकर बैठ गये। मीडिया वालों को साथ लाये थे तो उन्होंने अलग-अलग ऐंगल से पोजिशन ले ली। सामने पतरी - दोने में खिचड़ी और टमाटर की चटनी परसी गई । बिके हुए पत्रकार धड़ाधड़ और धका-पेल कैमरे चमकाने लगे, वीडियो बनने लगे, लाइव टेलीकास्ट चलने लगा। भोजन परोसने के बाद नेता जी ने गंगाजल से आचमन किया, लुंगी को खींचकर पैरों के नीचे दबाया और होम करने के लिए अचानक 'आग' की मांग कर दी। आचमन करके आग के चारों तरफ पानी फिरा के भोजन को शुद्ध करने की उनकी पुरानी आदत है।
सारे अधिकारी सकते में आ गए...... आग के बारे में तो किसी ने सोचा भी नहीं था न ही प्रोग्राम शिड्यूल में आग का जिक्र था। जब थोड़ा देर आग नहीं आई तो नेता जी आगबबूला हो गए। दलित को बुलाकर उज्जवला योजना की बात की। दलित ने बताया चूल्हा और सिंलडर तो मिल गया था पर गैस भराने के लिए पैसा नहीं था। देर होते देख बिना होम लगाए नेता जी ने एक चम्मच खिचड़ी खायी और मुंह बनाते हुए टमाटर की चटनी पीने लगे, दोने में छेद हो गया और टमाटर की चटनी नेता जी की कुर्ती में गिर गई। शाल और कुर्ती लाल हो गई। बाहर खड़े लाल टोपी पहिने स्कूल के बच्चों को हंसी आ गई .... नेता जी ने बच्चों को गुस्से से देखा तो पुलिस वालों ने बच्चों की भीड़ हटाने लाठीचार्ज कर दिया, भगदड़ मच गई, भगदड़ में कुछ लड़के घायल हो गए,खबर राजधानी तक पहुंच गई।
- एक दिन बाद पार्टी प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि बच्चे स्कूल से लौट रहे थे कि अचानक दो सांडों की लड़ाई के बीच फंस गए थे, भीड़ को तितर-बितर करने और दोनों साड़ों को हटाने हल्का लाठीचार्ज जैसा नाटक पुलिस ने किया था, नेता जी की सुरक्षा के लिए यह सब जरूरी भी था, परन्तु अब स्थिति नियंत्रण में है।जांच कमेटी बना दी गई है। घटना स्थल से कुछ लाल टोपी बरामद की गईं हैं। घायलों को पर्याप्त मुआवजा राशि देने की घोषणा कर दी गई है।
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जय प्रकाश पाण्डेय
जय नगर जबलपुर
9977318765

