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काव्य : जलता कैसे दीप - डॉ सत्यवान सौरभ ,भिवानी


 काव्य : 

जलता कैसे दीप


शुभ दीवाली आ गई, झूम रहा संसार।  

माँ लक्ष्मी का आगमन, सजे सभी घर द्वार।।  

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सुख वैभव सबको मिले, मिले प्यार उपहार।  

सच में सौरभ हो तभी, दीवाली त्यौहार।।  

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दीवाली का पर्व ये, हो सौरभ तब खास।  

आ जाए जब झोंपड़ी, महलों को भी रास।।  

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जिनके स्वच्छ विचार हैं, रखे प्रेम व्यवहार।  

उनके सौरभ रोज ही, दीवाली त्यौहार।।  

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दीवाली उनकी मने, होय सुखी परिवार।  

दीप बेच रोशन करे, सौरभ जो घर द्वार।।  

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मैंने उनको भेंट की, दीवाली और ईद।  

जान देश के नाम कर, जो हो गए शहीद।।  

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फीके-फीके हो गए, त्योहारों के रंग।  

दीप दिवाली के बुझे, होली है बेरंग।।  

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नेह भरे मोती नहीं, खाली मन का सीप।  

सूख गई हैं बातियाँ, जलता कैसे दीप।।  

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बाती रूठी दीप से, हो कैसे प्रकाश।  

बैठा मन को बांधकर, अंधियारे का पाश।।  

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दीया माटी का जले, रौशन हो घर द्वार।

जीवन भर आशीष दे, तुम्हे खूब कुम्हार।।

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दीया बाती ने किया, प्रेमपूर्ण व्यवहार।

जगमग हुई मुँडेर है, प्रकाशमय घर द्वार ।।

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दीया -बाती- सी परी,  तेरी -मेरी प्रीत।

हर्षित हो उल्लास उर, गाये मिलकर गीत।।

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दीया  में बाती जले, पावन ये व्यवहार।

अन्तर्मन उजियार ही,  है सच्चा श्रृंगार।।

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सदा शहीदों का जले, इक दीया हर हाल।

मने तभी दीपावली, देश रहे खुशहाल ।।

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दीया- बाती- सा बने, आपस में विश्वास।

चिंता सारी दूर हो, खुशियां करे निवास।।

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तपती बाती रात भर, लिए अटल विश्वास।

तब जाकर दीया भरे, है आशा उल्लास।।

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दीये सा जीवन करे, इस जगती के नाम।

परहित हेतु जो है मिटे, जीवन उनका धाम।।

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दीया माटी का जले, रौशन हो घर द्वार।

जीवन भर आशीष दे, तुम्हे खूब कुम्हार।।


-डॉ सत्यवान सौरभ ,भिवानी

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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