धन्वंतरि जयंती :-(धनतेरस)
कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी समुद्र मंथन के समय अमृत कलश को हाथ में लेकर उत्पन्न हुये बैद्यराज भगवान धन्वंतरि को समर्पित है । इसलिये इसे धन तेरस
प्रथम सुख निरोगी काया दूसर सुख घर में हो माया।यदि आप स्वस्थ हैं तभी तो धन को अर्जित कर उसे भोग सकेंगे।यदि शारीरिक और मानसिक व्याधायों से ग्रस्त हैं तो फिर समाज और परिवार दोनों पर ही बोझ। पौराणिक कथा के अनुसार स्वस्थ रहने के लिये औषधि उपचार रूपी संजीवनी अमृत कलश को लेकर भगवान विष्णु के अंशावतार स्वयं भगवान धन्वंतरि का जन्म आज के दिन होने से ही इसे धन तेरस भी कहा जाता है । पौराणिक कथा के अनुसार। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देव दानव नाग राक्षस सभी के द्वारा अमरत्व पाने की लालसा में एक दूसरे के विरोधी होने पर भी एकसाथ मिल कर सहयोग करते हुये समुद्र मंथन किया । समुद्र मंथन के समय सबसे पहले कालकूट विष निकला जिसको पीकर महादेव नीलकंठ बने । इसके बाद उच्चैश्रवा अश्व ऐरावत हाथी,कामधेनु गाय ,कल्पवृक्ष,पारिजात चंद्रमा,अप्सरायें ,वारुणी आदि के पश्चात स्वयं अमृत कलश लेकर भगवान धन्वंतरि प्रकट हुये ।उनके चार हाथों में एक हाथ मे शंख दूसरे में कलश तीसरे हाथ में जड़ी बूटी और चौथे हाथ में आयुर्वेद का ज्ञानहै । इसीलिए उन्हें आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि जी के साथ आज धन की देवी लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष धनपति कुबेर की पूजा रात्रिमें घी के दीपक जला कर मिष्टान्नों का भोग लगा कर की जाती है।द्वार पर उनके आगमन के लिये स्वागत में घृत के दीप जलाये जाते हैं ।
पौराणिक कथा :-
एक और कथा के अनुसार प्राचीन काल में काशी नरेश धन्वा के घर मेंआज के दिन उनके पुत्र का जन्म हुआ था । उसका नाम धन्वंतरि था वह प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य हुआ जिसके प्रमाण आज भी काशी में मौजूद हैं । व्यक्ति को निरोग रहने के लिये ही आयुर्वेद का जन्म हुआ । प्रकृति के माध्यम से जड़ी बूटियों का विपुल ज्ञान भंडार और उनका औषधि के रूप में निर्माण के साथ ही किस प्रकार से प्रयोग करना है इस सबके लिये ही आयुर्वेद की स्थापना हुई ।आज के दिन सभी चिकित्सक उनका पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं ।यह हमारी भारतीय सनातन संस्कृति है जिसे हम भूल रहे ।जै धन्वंतरि भगवान सबको निरोग का आशीर्वाद प्रदान करें ।* प्रथम-सुख निरोगी काया*। धन्यवाद
उषा सक्सेना,मुंबई
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